आजमगढ़। निजीकरण का हंटर चलते ही बिजली कर्मियों द्वारा वसूली और चोरी रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। कहीं मार्निंग रेड मारी जा रही है तो कहीं लोगों के घरों का लोड चेक किया जा रहा है। हजारों के बकाएदारों की विभाग द्वारा बिजली काटी जा रही है। वहीं सरकारी विभागों पर लाखों रुपये का बिल बकाया है लेकिन इनके खिलाफ विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सरकारी विभाग के बकाएदारों की स्थिति पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा बकाया बेसिक शिक्षा विभाग पर है।
विद्युत वितरण खंड प्रथम के 60000 विद्युत उपभोक्ताओं है। इन उपभोक्ताओं पर बिजली विभाग का लगभग 80 करोड़ रुपये बकाया है। सरकार द्वारा जब बिजली के घाटे को देखते हुए निजीकरण का फैसला लिया गया तो कर्मचारी आंदोलित हो गए। जिसका परिणाम हुआ दो दिनों की हड़ताल में पूरा जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कर्मचारियों का सरकार के साथ समझौता हुआ जिसमें तय हुआ कि अगर जनवरी तक घाटे को कम नहीं किया जाता है तो विभाग का निजीकरण कर दिया जाएगा। इसके बाद तो बिजली कर्मचारी हरकत में आ गए। विभाग का निजीकरण रोकने के लिए कर्मचारी सुबह छह बजे से रात को नौ बजे तक छापेमारी कर विद्युत चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुट गए हैं। लेकिन इन अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जहां हजारों का बकाया होने पर उपभोक्ताओं की बिजली काटी जा रही है वहीं सरकारी विभाग जिनके ऊपर लाखों करोड़ों रुपये बकाया हैं उनको नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। कई नेता भी ऐसे हैं जिनके ऊपर लाखों का विद्युत बिल बकाया है। लेकिन विभाग इनके पास कभी बिजली के बकाया बिल की वसूली करने भी नहीं जाता है।
ग्राम्य विकास विभाग के पहले से ही विभाग के पास जमा हैं लाखों
आजमगढ़। जिन विभागों के बिजली बिल बकाया है उनको नोटिस जारी है। जिसमें आबकारी 14.50 लाख, कृषि 14.24 लाख, ग्राम्य विकास -3.10 लाख, पशुधन 1.90 लाख, खेल 16.85 लाख, गृह 58.75 लाख, राजनैतिक पेंशन नागरिक सुरक्षा होमगार्ड 0.35 लाख, चिकित्सा शिक्षा 0.68 लाख, एलोपैथिक चिकित्सा 282.63 लाख, नगर विकास 156.93 लाख, न्याय 11.24 लाख, परिवहन 2.98 लाख, प्राविधिक शिक्षा 10.92 लाख, राजस्व 1.35 लाख, लोक निर्माण 74.16 लाख, वन 27.43 लाख, वित्त 0.57 लाख और 4.72 लाख, प्राथमिक शिक्षा 1215.27 लाख, माध्यमिक शिक्षा 136.80 लाख, समाज कल्याण 52.75 लाख, सूचना 0.02 लाख, सिंचाई 74.31 लाख, डाक विभाग और अन्य 4.42 लाख, पशु चिकित्सालय 9.23 लाख, पुलिस 22.02 लाख, खंड विकास अधिकारी 85.29 लाख, नागरिक उड्डयन 59.02 लाख, जिला प्रशासन 25.77 लाख और ग्राम्य पेयजल योजना 372.66 लाख रुपये विभागों पर बकाया हैं।
दो विभागों की बिल जमा करता है डीपीआरओ कार्यालय
बेसिक शिक्षा के ऊपर सबसे ज्यादा बकाया है। इस विभाग के विद्युत बिल जमा करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत राज कार्यालय की है। वहीं बकाए के मामले में दूसरे नंबर पर ग्राम्य पेयजल योजना हैं। इसका संचालन जल निगम द्वारा किया जाता है लेकिन इसका विद्युत बिल जमा करने की जिम्मेदारी भी जिला पंचायत राज कार्यालय की है।
जनप्रतिनिधि के ऊपर भी है लाखों का बिल बकाया
अधिशासी अभियंता ने बताया कि कई जनप्रतिनिधियों पर भी लाखों रुपये का विद्युत बिल बकाया है। पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं मीरा आजाद के पर छह लाख का बिजली बिल बकाया था। दो लाख रुपये जमा किया गया है। पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक दुर्गा प्रसाद के पास पांच किलोवाट का कनेक्शन है लेकिन इनका आठ अगस्त 2018 के बाद से अब कोई बिलिंग नहीं की गई है।
सरकारी विभागों के ऊपर हमारी काफी विद्यऊत बिल बकाया है। अगर इन बिलों का ही भुगतान हो जाए तो जनपद में बकाया की रकम को काफी कम किया जा सकता है। इसके लिए हमारी ओर से सभी विभागों नोटिस जारी किया गया है। साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई है कि वह बिल का भुगतान करें अन्यथा कनेक्शन का विच्छेदन कर दिया जाएगा। - अरविंद सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम।