जनपद के अजमतगढ़ विकास खंड स्थित ताल सलोना और ठेकमा विकास खंड के जमुआवां गांव स्थित ताल में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं। वहीं बड़े पैमाने पर इन मेहमान पक्षियों का शिकार किया जाता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इन पक्षियों के संरक्षण के लिए सिर्फ गश्त तक सिमटे हैं।
अजमगतगढ़ विकास खंड स्थित ताल सलोना 270 हेक्टेअर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। वहीं ठेकमा विकास खंड के जमुआवां गांव के ताल की परिधि लगभग पांच किमी है। इन दोनों तालों में प्रतिवर्ष ठंड के मौसम में हजारों की संख्या में विदेशी पक्षियों का आगमन होता है। ये पक्षी आते तो हैं हजारों की संख्या में लेकिन लौटते हैं सैकड़ों की संख्या में। क्योंकि इनका बड़े पैमाने पर शिकार शिकारियों द्वारा किया जाता है।
हालांकि वन विभाग की टीम इन पक्षियों को बचाने के लिए क्षेत्र में गश्त तो करती है, लेकिन इनका शिकार होने से रोक नहीं पाती। पक्षियों का शिकार करने के बाद ये पक्षी चट्टी चौराहों पर चोरी से बेचे जाते हैं। शौकीन पक्षियों के मिलने वाले स्थानों को जानते हैं और वहां पहुंचकर इनकी खरीदारी करते हैं। वर्तमान में तालों पर पक्षियों के आगमन में कमी हुई है।
यह सही है कि विदेशी पक्षियों के आगमन में कमी आई है। हो सकता है ठंडी कम पड़ने के कारण ऐसा हुआ हो। इस समय ताल में पानी कम है इस लिए पशु पक्षी भी कम ही आते हैं। विदेशी पक्षियों के संरक्षण के लिए वन विभाग की टीम लगातार गश्त करती है। इसके बाद भी शिकारी चोरी-छिपे शिकार कर ही लेते हैं। सतीश सिंह, वन क्षेत्राधिकारी, सगड़ी तहसील