दो दिनों से लगातार पड़ रहे कोहरे से जहां लोग शाम होते ही घरों में दुबक जा रहे, वहीं वाहनों और ट्रेनों की रफ्तार पर लगाम लग गई है। आलम यह है कि बस और कार जहां पांच से छह घंटे में 100 किमी. की दूरी तय कर रहे।
वहीं ट्रेनें तीन से चार घंटे देर से चल रही हैं। एकाएक ठंडक ने लोगों को कंपा कर रख दिया। वही नगर पालिका प्रशासन सिर्फ कागजों पर ही अलावा जलाए है। दावा है कि 11 जगह अलाव लगा है लेकिन जला सिर्फ दो ही स्थ्ाान पर है।
मंगलवार को दोपहर करीब बारह बजे तक कोहरा छाया रहा। करीब दो बजे सूरज की झलक दिखी। लेकिन वह भी बेअसर थी। शाम चार बजे के बाद कोहरा पुन: शुरू हो गया। रात आठ बजे के बाद सड़कों पर चलना दूभर हो गया।
छोटे वाहन बस या ट्रकों के सहारे उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। आजमगढ़ रोडवेज से वाराणसी कैंट की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। इस मार्ग पर चलने वाले वाहन जो रास्ता तीन से साढ़े तीन घंटे के भीतर तय करते थे।
वह वाहन रेंगते हुए यह दूरी पांच से छह घंटे में तय कर रहे हैं। यही हाल आजमगढ़-जौनपुर मार्ग, फैजाबाद, अंबेडकर नगर, गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर आदि मार्ग पर चलने वाले वाहनों का भी रहा।
ठंड की वजह से सुबह स्कूल जाने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को भी परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ा। पछुवा हवा बहने से कोहरे के साथ गलन तेज हो गई।
ठंड को देखते हुए नगरपालिका की तरफ से जिला अस्पताल आैर ब्रह्मस्थान के पास ही अलाव की व्यवस्था की गई थी। जो नाकाफी रही।
एक तरह से कहा जाए तो अलाव सिर्फ कागजों पर ही जलाए जा रहे हैं। हालांकि नगर पालिका तो दावा बहुत कर रही लेकिन वह धरातल पर नहीं दिख रहा।