जिले में साहित्य और रंगमंच को आयाम देने वाले हरिऔध कला भवन के पुनर्निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की सूचना पर शनिवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई खुद वहां जांच करने पहुंचे। डीएम ने निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे मैटेरियल की जांच कराने का आदेश लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अभिनेश कुमार को दिया। साथ ही गुणवत्ता की जांच के लिए वहां प्रयोगशाला स्थापित करने का आदेश दिया है।
बताते चले कि कला भवन काफी जर्जर हो गया था। साथ ही ढहने लगा था। इस भवन के पुनर्निर्माण के लिए सपा सरकार ने 18 करोड़ रुपया अवमुक्त किया। निर्माण का दायित्व कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को सौंपा गया है। वर्तमान समय में कला भवन का निर्माण जोरों पर है लेकिन भवन के निर्माण में जिस सरिया का प्रयोग किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है।
सरिया पर आईएसआई मार्का के होलोग्राम तक नहीं है। इसके अलावा, सरिया शार्ट लेंथ की हैं। सूत्रों की माने तो इस तरह की सरिया प्लांटों से कम रेट पर उपलब्ध हो जाती है। इस गोलमाल की सूचना मिलने पर शनिवार को डीएम सुहास एलवाई मौके पर पहुंच गए। उन्होंने निर्माण के लिए बनाई गई फर्श को खुदवा कर देखा।
बताया कि यह ऐतिहासिक धरोहर है, इसके निर्माण में किसी भी कीमत पर मानक से समझौता नहीं किया जाएगा। जब बिना आईएसआई मार्क वाली सरिया के प्रयोग करने के बाबत पूछे जाने पर डीएम ने बताया कि वे इसकी जांच का आदेश पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता अभिनेश कुमार को दिए हैं। जिस मैटेरियल की जांच यहां नहीं हो पाएगी, उसे जांच के लिए बाहर भेजा जाएगा।