सगड़ी के भदौरा में बंधें के लिकेज को को बंद करते श्रमिक।
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लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लगभग सवा लाख की आबादी घाघरा के बाढ़ की विभिषिका को झेल रही है। प्रशासन भी महुला गढ़वल बांध को बचाने में जुटा हुआ है। भदौरा ढ़ाले पर रिसाव की सूचना मिलने पर बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से सीपेज को बंद कराया।
सगडी तहसील में बाढ़ का कहर तेज हो गया है। तहसील के 80 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। जिसके कारण लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। ग्रामीणों के लिए प्रशासन ने 125 नाव लगाई हैं। बाढ़ से सवा लाख की आबादी प्रभावित है। घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ से प्रभावित गांवों में बाढ़ का पानी घरों में भरा होने से लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त है। एडीएम वित्त एवं राजस्व गुरु प्रसाद ने बताया कि सगड़ी तहसील के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में 125 नाव राहत व बचाव कार्य के लिए लगाया गया है। नावों से बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। तहसील में बाढ़ को देखते हुए 10 बाढ़ की चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। महुला गढ़वल बांध पर भदौरा ढ़ाला पर रात में सीपेज शुरू हुआ। इसकी जानकारी होते ही कई गांवों के ग्रामीण वहां जमा हो गए। सूचना मिलते ही सहायक अभियंता धनंजय यादव, अवर अभियंता संजय कुमार व अधिशासी अभियंता दीपक कुमार भी मौके पर पहुंचकर सीपेज को ठीक कराने में जुट गए। ग्रामीणों के अथक प्रयास से सीपेज को बंद कर दिया गया। मौके पर पहुंचे डीएम राजेश कुमार ने बताया कि अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड दीपक कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए हमने शासन को पत्र लिख दिया है। एसडीएम को बाढ़ से हुई क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। केरोसिन आयल का भी उठान कोटेदार कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही वितरित किया जाएगा।
राशन और क्लोरिन की गोली अभी तक नहीं मिली
लाटघाट। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। इन गांवों में अब तक क्लोरीन की गोली का वितरण नहीं किया गया है। जिसके कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। बिजली न होने से लोगों के घर अंधेरे में डूबे हैं, लेकिन अब तक केरोसिन तेल नहीं मिला। घर में रखा खाने का सामान भीग गया है लेकिन अब तक उन्हें प्रशासन की ओर से राशन का वितरण नहीं किया गया है। गांवों में प्रशासन का कोई अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंच रहा है। वहीं बाढ़ से घिरे गांवों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
बनी हुई है नाव की समस्या
लाटघाट। प्रशासन की ओर से कुल 125 नाव लगाई गई हैं। लेकिन आबादी को देखते हुए यह नाकाफी साबित हो रही है। बढ़ते जलस्तर को देख लोगों को अपने पशुओं की चिंता सताने लगी है। लोग नाव के लिए दौड़ रहे हैं लेकिन नाव की कमी उनकी राह में बाधक बन रही है।