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बाढ़ की मार ने तोड़ी कमर, इलाज के अभाव में हो रही मौत

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निजामाबाद के कोडर गांव में जाने वाला मुख्य मार्ग कटा, पानी और कीचड़ से होकर जाते ग्रामीण। - फोटो : AZAMGARH
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निजामाबाद। सब्जियों की खेती के लिए मशहूर निजामाबाद का कोडर गांव बाढ़ में रास्ता कटने के कारण परेशानियों में घिर गया है। बाढ़ से जहां सब्जी की खेती करने वाले किसानों की कम टूट गई है। वहीं रास्ता कटने से गांव के लोगों का आवागमन दुरूह हो गया है। बुधवार रात को गांव में एक बुजुर्ग की हालत बिगड़ गई। पहले तो परिजनों ने ठेले आदि से उसे अस्पताल ले जाने की सोची, लेकिन रास्ते की हालत से सुबह का इंतजार करने लगे। रात में ही उसकी मौत हो गई।
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निजामाबाद तहसील से पांच किमी दूर पूरब दिशा में कोडर गांव स्थित है। इस गांव की आबादी 1700 से ज्यादा है। जिसमें मौर्या, लोहार, हरिजन जाति के लोग निवास करते हैं। यहां जायद और खरीफ की फसलों के साथ हरी सब्जी की काफी खेती होती है। हरी सब्जी की सप्लाई का यह गांव बड़ा केंद्र माना जाता है। गांव में प्रवेश और निकलने का एक ही मार्ग है जो प्रत्येक वर्ष बाढ़ की चपेट में आ जाता है। बाढ़ आने की दशा में गांव का संपर्क कट जाता है। पिछले दिनों भारी बारिश के बाद गांव बाढ़ की चपेट में आ गया था। गांव में जाने वाला मार्ग डूबने के साथ ही पूरी तरीके से कट गया था। पानी रहने पर एसडीएम की ओर से नाव की व्यवस्था कराई गई थी, लेकिन घटने के बाद इस रास्ते की कोई सुधि नहीं ले रहा है। इस रास्ते में चलना काफी दुरुह हो गया है। अकेले तो निकला भी जा सकता है, लेकिन वाहन निकालना नामुमकिन सा है।मंगलवार रात गांव में राजदेव मौर्य (55) पुत्र स्व. दूधनाथ मौर्य की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। ग्रामीण उन्हें ठेले पर लादकर डाक्टर के यहां ले जाने का प्रयास करने लगे,लेकिन ग्रामीणों की हिम्मत रास्ता पार करने में जवाब दे गई। रात में राजदेव की मौत हो गई। बाढ़ से खेती तबाह तो हुई ही है पानी और रास्ता कटने के कारण इलाज में भी दुविधा आ रही है।
सब्जी को बाजार पहुंचाना भी पड़ता है भारी
निजामाबाद। जिस समय बाढ़ अपने चरम पर होती है उस समय ग्रामीणों का गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। जिसके कारण वह दैनिक जरूरतों के सामान की खरीद नहीं कर पाते हैं। उनके द्वारा पैदा की गई हरी सब्जियों को बाजार तक पहुंचाना भारी पड़ता है। जिसके कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं गांव से बाहर पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी बाधित हो जाती है।
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