फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुट्ठी करें गर्म, बनाएं जहां चाहें जैसे चाहें कॉलोनी

Thu, 14 Dec 2017 12:38 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
विज्ञापन
हरबंशपुर में तमसा नदी की तरफ बढ रहा अवैध निर्माण। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आजमगढ़। जिले में विकास प्राधिकरण का गठन तो हो गया लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अवैध कमाई का अड्डा बना लिया है। ग्रीनलैंड और कृषि क्षेत्र में धड़ाधड़ मल्टीस्टोरी इमारतों का निर्माण हो रहा है सबकुछ जानते हुए भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौन हैं।
विज्ञापन


इनके द्वारा महायोजना का हवाला देकर लोगों से मोटी रकम वसूल कर भवनों का निर्माण कराने के  आरोप लग रहे हैं।

20 जून 2008 को आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। गठन के समय 1985 से 2011 तक की महायोजना लागू थी। प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद भी महायोजना के तहत जिले के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया।

अलबत्ता जिले के कुछ क्षेत्रों को ग्रीन लैंड और कृषि क्षेत्र घोषित कर इन क्षेत्रों में मकान बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लोगों से पैसा लेकर निर्माण कराते रहे।
विज्ञापन


2011 में पुरानी महायोजना के पूरा होने पर नई महायोजना लागू नहीं हुई। जिसका फायदा उठाते हुए जगह-जगह प्लाटिंग कर प्रतिबंधित क्षेत्र में बड़ी-बड़ी कालोनियों का निर्माण करा दिया गया।

इसमें विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का भी पूरा हाथ रहा। लेकिन डीडीसी ऋतु सुहास को जब प्राधिकरण का सचिव बनाया गया तो उन्होंने सख्ती दिखाई और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने, कई भवनों को सील और ग्रीन लैंड और कृषि क्षेत्र में भवनों का निर्माण कराने वालों को नोटिस दी।

इतना ही नहीं उन्होंने एक बिल्डर की आफिस को भी सील किया था। उनके समय में अवैध निर्माणों पर रोक लगी थी। लेकिन उनके जाते ही एक बार फिर जिले में अवैध निर्माणों की बाढ़ सी आ गई।

जिन भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश हुआ था उन भवन मालिकों ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तैयार कर ली। इनमें से कई भवन मालिकों की अपील कमिश्नर न्यायालय में लंबित है।

विभाग में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जिस अवैध निर्माण की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा विभाग को दी जा रही है। उसका निर्माण विभागीय अधिकारियों की जानकारी के बाद भी पूरा हो जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों की कमी का रोना रो कर विभाग द्वारा आफिस के चपरासियों से अवैध निर्माणों की सूचना इकठ्ठी की जाती है। सूचना के बाद ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर वसूली का तेजी से किया जा रहा है।

विभाग में कर्मचारियों की कमी है, जिसके कारण हम जिले में हो रहे अवैध निर्माणों पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं। लोग अवैध निर्माण करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
डीबी राम, सहायक अभियंता, एडीए।

विभाग की ओर से नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी कमिश्नर कोर्ट चल जा रहे हैं। इसलिए कार्रवाई रुक जा रही है। ऊपर से दबाव आने के कारण भी प्रभावी कार्रवाई नहीं पा रही है।
बाबू सिंह, सचिव,एडीए

केस एक
नगर से सटे बिजौरा कालोनी में पूर्व एडी स्वास्थ्य डा. निरंकार सिंह के हास्पीटल को कृषि क्षेत्र में होने के कारण सील किया गया था। आज भी वह भवन उसी तरह से सील पड़ा है। जबकि उसके अगल-बगल जिन प्लाटिंगों को विकास प्राधिकरण द्वारा ढहाया गया था। उनमें से कई बिल्डिंगें बनकर तैयार हो चुकी और कई बिल्डिंगें पूरी होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।

केस दो
नगर के प्रहलाद नगर कालोनी के पश्चिमी छोर पर बने एक नेत्र अस्पताल को कृषि क्षेत्र में होने के कारण गिराने का आदेश प्राधिकरण सचिव की ओर से जारी किया गया था, लेकिन आज यह अस्पताल संचालित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से उक्त अस्पताल में व्यावसायिक गतिविधि पूर्ण रूप से संचालित हो रही है।

केस तीन
नगर के बवाली मोड़ पर स्थित कई भवनों को ग्रीनलैंड एरिया में होने के कारण नोटिस जारी किया गया था। एक लॉज को गिराने के लिए एडीए सचिव बुलडोजर के साथ वहां पहुंच भी गई थी, लेकिन उनके जाने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया। उक्त लॉज और वहां बनी सारी दुकानों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

केस चार
बागेश्वर नगर स्थित कृष्णा कालेज को ग्रीनलैंड में होने के कारण ध्वस्तीकरण का आदेश हुआ। प्रबंधक हाईकोर्ट भी गए लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद भी आज तक उक्त विद्यालय का ध्वस्तीकरण नहीं हो सका है। एक बार प्रशासन ने कोशिश की, लेकिन विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र और उनके अभिभावक आड़े आ गए, जिसके कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी।

केस पांच
नगर के मड़या मुहल्ले में बंधे के दूसरी तरफ तेजी से बन रहे एक होटल को भी एडीए सचिव की ओर से ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया। लेकिन आज उक्त भवन बनकर तैयार है और उसमें होटल भी संचालित हो रहा है। हालांकि विभाग को इसकी जानकारी भी दी गई लेकिन भवन का निर्माण नहीं रूका और आज यह पूरा हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें