सत्यापन के दौरान पुलिस टीम को पता चला कि सभी जमानतदार अभियुक्तों से मिलीभगत कर कूटरचित अभिलेखों, फर्जी दस्तावेजों और गलत नाम-पते के आधार पर जमानत लेते हैं। ऐसे अनजान अभियुक्त जिनको वह जानते तक नहीं, उनकी जमानत केवल पैसों के लालच में लेते हैं और में उनसे कोई मतलब नहीं रखते।
पुलिस टीम ने गोपनीय रूप से जमानतदारों का सत्यापन अभियान चलाया गया तो चौकाने वाली बात सामने आई। इन सभी जमानतदारों ने आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से डकैती, लूट, हत्या, चोरी, नकबजनी, गैंगस्टर एक्ट आदि के अभियुक्तों की जमानत ली है।
जमानतदार दुर्गविजय सिंह और मिश्रीलाल को फर्जी जमानत के मामले में आजमगढ़ कोतवाली पुलिस ने 13 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया था। उदयभान यादव के घर पर ताला लगा मिला। पड़ोसियों ने बताया कि वो नशेड़ी किस्म का व्यक्ति है और पैसों के लिए अजनबी अभियुक्तों की जमानत लेता है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
जमानतदार शंकर घर पर मौजूद नहीं मिला। परिजनों ने बताया कि वह अत्यधिक नशा करता है पैसों के लिए जमानत लेता है। जमानतदार चंद्रशेखर के पते पर जांच करने पर पता चला कि पते पर इस नाम का कोई व्यक्ति निवास नहीं करता है, ग्राम प्रधान ने भी इसकी पुष्टि नहीं की।
सत्यापन के समय पता चला कि अभियुक्त जानबूझकर षड्यंत्रपूर्वक आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए पेशेवर व फर्जी जमानतदारों से मिलीभगत कर कूटरचित दस्तावेज, फर्जी पते, भ्रामक विवरण और धोखाधड़ी के माध्यम से अपनी जमानत कराई है। जमानत लेते समय न्यायालय को पूर्व में ली गई जमानतों का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इनके द्वारा संगठित तरीके से अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से जमानत ली जाती रही है। - अनिल सिंह, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली मऊ