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Azamgarh News: दूध में वसा और प्रोटीन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम, 82 नमूनों में से 52 फेल

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आजमगढ़। जिले में दूध की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच में 82 दूध के नमूनों की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें 52 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से चार नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए, जो गंभीर चिंता का विषय है। इस वर्ष अब तक आई 15 जांच रिपोर्ट में 10 नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे।
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खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले के विभिन्न स्थानों से दूध के नमूने एकत्रित किए थे। जांच में पाया गया कि फेल हुए नमूनों में वसा और प्रोटीन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम थी। वहीं, हानिकारक नमूनों में बैक्टीरियल संदूषण और अन्य अशुद्धियों की मौजूदगी पाई गई, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि फेल हुए दूध के नमूनों में पानी की मिलावट और पोषक तत्वों की कमी प्रमुख कारण रहे। विभाग ने इस वर्ष 15 जांच रिपोर्ट्स जारी कीं, इनमें 10 नमूने मानकों पर विफल रहे। अधिकारियों ने बताया कि मिलावट और असुरक्षित दूध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी दुकानदारों और सप्लायर्स पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जनता से अपील की गई है कि वे दूध खरीदते समय सतर्क रहें और ब्रांडेड उत्पादों को प्राथमिकता दें।
एक आरोपी को तीन महीने कारावास और 1000 रुपये का लगा अर्थदंड
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा 2024-25 में 209 नमूने लिए गए थे। इनमें से 109 नमूने दूधे के थे। इन नमूनों में से 82 की जांच लैब से आई। इसमें से 52 नमूने फेल मिले और चार नमूने मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। इनमें से 61 मुकदमों को एडीएम कोर्ट में दाखिल किया गया। जबकि चार को एसीजेएम कोर्ट में सजा के लिए दायर किया गया। एडीएम कोर्ट से 2024-25 में 82 वाद और एसीजेएम कोर्ट से एक मुकदमे का निस्तारण हुआ। एडीएम कोर्ट ने 11 लाख 23 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जबकि सीजेएम ने एक आरोपी को तीन महीने का कारावास और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया।
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इस वर्ष लिए गए 21 नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इस वर्ष एक अप्रैल से अब तक 21 दूध कारोबारियों से नमूनों को लेकर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा है। इनमें से 15 नमूनों की रिपोर्ट मिली, इसमें 10 नमूने फेल पाए गए। सभी के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। इस वर्ष एडीएम कोर्ट ने पांच मुकदमों में अपना फैसला भी दे दिया है और आरोपियों पर 82 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा मिलावट पर लगाम लगाने के लिए कार्रवाई की जाती है। इसके लिए संदेह के आधार पर दुकानदारों आदि से सैंपल कलेक्शन किया जाता है। इसके बाद उसे फॉरेेंसिक लैब भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर नमूना अधोमानक है तो उसे एडीएम कोर्ट और अगर मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो उसे एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर सजा का निर्धारण कराया जाता है। -सुशील कुमार मिश्र, सहायक आयुक्त खाद्य।
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