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मोहिद्दीनपुर में सैकड़ों बीघे खेत में किसानों ने जलाई गेहूं की पराली

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मोहम्मदपुर ब्लाक के मोहिद्दीनपुर खेत में जलाया गया गेहूं कटने के बाद बचे हुए अवशेष। - फोटो : AZAMGARH
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बिंद्राबाजार। प्रतिबंध के बावजूद किसान बेखौफ खेतों में कृषि अवशेष को जला रहे हैं। खेतों में फसल के अवशेष जलाने से जहां वायू प्रदुषण बढ़ रहा है, वहीं भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है।
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प्रशासन ने पराली जलाने वालों पर निगरानी के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की है। इसके बावजूद भी पराली जलाने पर क्षेत्र में किसी भी किसान पर कार्रवाई नहीं हुई है। शासन ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए खेतों में गेहूं और धान की फसलों को पराली जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। इसके बावजूद भी किसान मान नहीं रहे हैंँ। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में पराली जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। वहीं मिट्टी में मौजूद किसान मित्र कीट नष्ट हो जाते हें। इसका सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ता है। पराली के धुएं से पर्यावरण को प्रदूषण बढ़ता जा है। मोहम्मदपुर ब्लाक के मोहिद्दीनपुर के सिवान में सैकड़ों बीघे खेत में गेहूं काटने के बाद बचे हुए अवशेष को किसान खेत में जला रहे हैं। इससे क्षेत्र में चारों तरफ धुआं ही धुआं दिखाई पड़ रहा हैं। वहीं फरिहा-मोहम्मदपुर मार्ग पर काफी देर तक धुंध छाए रहा। लेकिन न तो कोई जिम्मेदार पहुंचा, ना तो इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई की गई। मामले में क्षेत्रीय लेखपाल आंख मूंदे है।
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