लालगंज। विकासखंड के टीकरगाढ़ स्थित सौ शैया संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टरों की मनमानी गरीब मरीजों को भारी पड़ रही है। अस्पताल में प्रतिदिन 1000 से 1200 ओपीडी मरीज और 100 से 125 इमरजेंसी केस आते हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बावजूद डॉक्टर मरीजों को बाहर की महंगी दवाइयां लिख रहे हैं। इससे गरीब मरीज आर्थिक रूप से टूट रहे हैं।
चिकित्सालय में वर्तमान में 13 चिकित्सक तैनात हैं, जिनमें तीन महिला चिकित्सक भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ डॉक्टरों को छोड़कर अधिकांश डॉक्टर सरकारी पर्ची पर नाम मात्र की दवा लिखते हैं और बाकी दवाएं स्वयं की पर्ची पर बाहर की मेडिकल दुकान से खरीदने को मजबूर करते हैं।
ग्राम सरूपहां निवासी रुचि पुत्री रामचंद्र ने बताया कि मुझे कई दिनों से बुखार है। डॉक्टर ने लगभग 500 रुपये की बाहर की दवा लिख दी। जब मैंने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं, तब जाकर उन्होंने अस्पताल की दवा दी और पांच दिन बाद दोबारा आने को कहा।
वहीं, ग्राम चौकी मनियरा निवासी प्रहलाद ने बताया कि उनके बाएं हाथ में फ्रैक्चर था, लेकिन डॉक्टर ने उन्हें भी अस्पताल की दवा के साथ-साथ बाहर की दवा लिख दी। इसी प्रकार बेलवरिया केराकत निवासी अनूप कुमार को मलेरिया की शिकायत पर भी बाहर की दवाएं लिखी गईं।
मरीजों ने यह भी बताया कि डॉक्टर न तो अस्पताल में उपलब्ध दवाएं लिखते हैं और न ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की सस्ती दवाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि वहीं पर सस्ते दामों में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
सभी डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह बाहर की दवाएं न लिखें। अस्पताल की ओपीडी के बाहर सभी आवश्यक दवाओं की सूची चस्पा की गई है। यदि किसी विशेष दवा की आवश्यकता हो, तो डॉक्टर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से मिलने वाली दवाएं ही लिखें। अगर कोई इस निर्देश का उल्लंघन करेगाा तो कार्रवाई की जाएगी। - डाॅ सुरजीत सिंह, सीएमएस।