आजमगढ़। पुलिस लाइन परिसर में शुक्रवार को दिन में बारी-बारी से आंसू गैस के 20 गोले दागे गए और रबड़ की गोलियों से टारगेट पर निशाना साधा गया। ये गोले न तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दागे गए थे, न ही इनका वहां मौजूद लोगों पर कोई खास असर ही हुआ। दरअसल पुलिस की यह कवायद दंगा नियंत्रण अभ्यास का हिस्सा थी। करीब दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में एसपी ने मातहतों को दंगे से निपटने और अपना बचाव करने के कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
शुक्रवार की सुबह आठ बजे एएसपी सिटी, ग्रामीण, सभी सीओ और थानाध्यक्ष पुलिस लाइन परिसर में पहुंच गए। पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने सभी के वाहन और हमेशा साथ रहने वाले दंगा नियंत्रण यंत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान करीब एक दर्जन थानों की जीप में पूरे सामान मौजूद नहीं मिले। किसी का लाउडस्पीकर खराब, तो किसी के पास बुलेट प्रूफ जैकेट या हेलमेट, वीडीओ कैमरे आदि पर्याप्त मात्रा में नहीं थे। इसके बाद उन्होंने गैस गन और रबड़ की गोलियां चलवाईं और दंगे के समय मौजूद भीड़ को तितर-बितर करने, उपद्रवकारियों से निपटने, घटना के समय मौके पर और भीड़ के बीच जाने से पहले की तैयारी के अलावा यदि अधिकारी लोगों से बात कर रहे हैं तो मातहतों को कहां और किस मुद्रा में खड़ा रहना है, इसकी विधिवत जानकारी सभी को दी। अभ्यास के दौरान बाडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, बुलेट प्रूफ जैकेट को पहनने और आंसू गैस के गोले किस प्रकार से दागने हैं कि भी जानकारी दी।
कोट
आंसू गैस के 20 गोलों की अवधि समाप्त हो जाने पर उन्हें रिहर्सल के दौरान नष्ट करवा दिया गया। वर्तमान में हेलमेट, बुलेट प्रूफ जैकेट और आंसू गैस के गोलों की भारी कमी है। आवश्यक सामग्रियों की सूची बनाकर उन्हें जल्द उपलब्ध कराने के लिए पुलिस मुख्यालय पत्र भेजा गया है। - राणा महेंद्र प्रताप सिंह प्रतिसार निरीक्षक ।