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Azamgarh News: जुलाई में 154 और अगस्त में 52 पोखरों की शुरू हुई खोदाई

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वीबीजी-रामजी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार व आजीविका मिशन) के तहत चालू वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 548 पोखरों की खोदाई वीबीजी-रामजी के पोर्टल पर दर्ज है।
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इनमें से 206 पोखरों की खोदाई बारिश के दो महीनों जुलाई और अगस्त में दर्ज की गई। इसमें जुलाई में 154 और अगस्त में 52 पोखरों की खोदाई शुरू की गई। इस दौरान कई पोखरों में पहले से पानी भरा होने के बावजूद खोदाई के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है।
मनरेगा की तरह वीबीजी-रामजी में भी 15 जुलाई के बाद मिट्टी के कार्य पर रोक लगा दी जाती है, क्योंकि बारिश में खेत से लेकर खलिहान तक पानी भरा होने से कच्चे कार्य नहीं कराए जा सकते। बारिश के मौसम में पोखरों में पानी भरा होना स्वाभाविक है।
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इसके बावजूद जुलाई और अगस्त में पोखरा खोदाई धड़ल्ले से कराई गई और भुगतान भी कर दिया गया। इस दौरान ब्लॉक मुख्यालय से लगायत विकास भवन में कार्यरत वीबीजी-रामजी सेल निष्क्रिय रहा।
वीबीजी-रामजी सेल की ओर से जुलाई और अगस्त में कुछ चहेती ग्राम पंचायतों में पोखरा खोदाई की स्वीकृति देने में तेजी दिखाई गई। कई स्थानों पर पोखरों में पानी भरा होने के बावजूद कागजों में कार्य स्वीकृत कर दिए गए।

बिना सत्यापन आंख मूंदे कर दिया भुगतान
पोखरा खोदाई का उद्देश्य जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके लिए ऐसे समय में कार्य कराया जाना चाहिए, जब पोखरे खाली हों और खोदाई संभव हो। लेकिन बारिश के दौरान स्वीकृति दिए जाने से यह सवाल उठना लाजिमी है कि संबंधित अधिकारियों ने कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन किया था या नहीं। इसमें 14 दिन का मस्टररोल पूरा होने के बाद खंड विकास अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद भुगतान के लिए डोंगल लगाया जाता है। बीडीओ के डोंगल लगाने के बाद डीडीओ के डोंगल लगाते ही संबंधित श्रमिकों के खाते में धनराशि चली जाती है। अब ऐसे में यदि सत्यापन हुआ था तो पानी से भरे पोखरों में खोदाई और भुगतान किस आधार पर किया गया। मामले की जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

02 सितंबर को भी दी पोखरा खोदाई की स्वीकृति
मनरेगा की तर्ज पर वीबीजी-रामजी में भी ब्लाक प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। वीबीजी-रामजी सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल हैं। मेंहनगर ब्लाक के कठात चक कठात ग्राम पंचायत में भुवला पोखरी की खोदाई के लिए कुल 3,91,825 रुपये का स्टीमेट बनाकर 02 सितंबर को कार्य शुरू कराने की ब्लाक प्रशासन की ओर से स्वीकृति दी गई है।

केस एक
जहानागंज ब्लाक के दौलताबाद ग्राम पंचायत में पिंटू सिंह के खेत के बगल में स्थित पोखरे की नौ जुलाई से खोदाई शुरू हुई। पोखरे की खोदाई का 7,42,046 रुपये का स्टीमेट बनाया गया। इसमें 2517 मानव दिवस सृजित करते हुए 3,16,632 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है।

केस दो
ठेकमा ब्लाक के बख्शपुर ग्राम पंचायत में सुजहां पोखरी के पास छोटी पोखरी की खोदाई का 4,24,257 रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया। इस पोखरी पर 24 जुलाई को खोदाई कार्य की शुरुआत कागजों में दर्शाई गई है। इस पर 70,200 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया, जबकि इस दौरान जिले में जमकर बारिश होती रही।

केस तीन
ठेकमा ब्लाक की ग्राम पंचायत बरसवां में सत्ती पोखरी का कुल 6,57,907 रुपये का स्टीमेट बनाया गया। इस पर 04 अगस्त को खोदाई का कार्य शुरू होना दिखाया गया है। यहां पोखरा खोदाई में 1015 मानव दिवस सृजित कर 2,39,700 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है।

केस चार
महाराजगंज ब्लाक के नौबरार तुर्क कच्छा ग्राम पंचायत में पोखरा खोदाई की स्वीकृति 30 अगस्त को दी गई। इस पोखरा खोदाई के लिए कुल 54,326 रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।
वर्जन
बारिश के समय पोखरा खोदाई आदि मिट्टी के कार्य कराना जांच के दायरे में है। उपायुक्त आजमगढ़ को पत्र जारी किया गया है। इसमें संबंधित विकास खंडों की ग्राम पंचायतों के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने, कार्य की स्वीकृति और फोटो अपलोड की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, कार्रवाई की जाएगी। -रामबाबू त्रिपाठी, संयुक्त आयुक्त विकास, आजमगढ़।
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