यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षकों और बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों को पारिश्रमिक राशि के भुगतान में भी गड़बड़ी करने का मामला सामने आ रहा है। शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने शिक्षकों का कुल एक लाख रुपये से अधिक पैसा उनके खाते में न डालकर अपने निजी खाते में डाल लिया है। डीएम अमृत त्रिपाठी ने मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर एक बार फिर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने टीम गठित कर मामले की जांच भी कराई है। आरोप है कि कार्यालय के एक बाबू द्वारा 2012 से 2015 तक लैपटॉप व कन्या विद्याधन में धांधली की गई है। लैपटॉप एवं कन्या विद्याधन में प्राप्त कंटीजेंसी (कार्यालय व्यवस्था मद) का दुरुपयोग करते हुए अनियमित तरीके से अपने करीबी के फर्म के नाम से कई बार लाखों रुपये का चेक काटा गया है। वहीं आरोप है कि बोर्ड परीक्षा के कार्यों में लगाए गए शिक्षकों का पारिश्रमिक भुगतान उन्हें न करके एक राजकीय इंटर कालेज के शिक्षक जो डीआईओएस कार्यालय में बाबू की मिलीभगत कर धनराशि अपने निजी खाते में स्थानांतरित कर लिया गया। इसकी शिकायत भी हुई है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक योगेंद्र सिंह ने बताया कि राजकीय इंटर कालेज जोकहरा में तैनात एक शिक्षक द्वारा पारिश्रमिक की धनराशि परिवार के किसी सदस्य के निजी खाते में भेज दी गई थी। शायद उनके द्वारा अब वह धनराशि वापस कर दी गई है लेकिन यह बड़ी गड़बड़ी है। जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान लेकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।