नालों से गुजर रहीं पेयजल पाइपें, बढ़ा रहीं बीमारी का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। नगर पालिका क्षेत्र में हर महीने पाइपलाइन में लीकेज की हर महीने 30 से 40 शिकायतें आ रही हैं। दो से तीन मोहल्लों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। गंदे नालों से पेयजल की पाइपें गुजर रही हैं। यह कुव्यवस्था शहर में जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ी कर रही है।
नाली-नालों के गंदे पानी से होकर गुजर रही पाइप लाइनों से दूषित पानी पहुंचने से बीमारी का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज से नालों का गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है। जलकल विभाग में हर महीने लीकेज की 40 शिकायतें और गंदे पानी की आपूर्ति की दो से तीन शिकायतें पहुंच रही हैं।
नगर के अधिकांश मोहल्लों में घरों तक जाने वाली पाइप लाइन नालियों के भीतर या उनके किनारे से होकर गुजर रही हैं। ऐसे में पाइपलाइन में जरा सी खराबी आने पर गंदा पानी सप्लाई वाटर में मिल जाता है। बारिश में जब नाले उफान पर होते हैं, तब पाइप लाइन डूब जाती है। दूषित जलापूर्ति शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नलों से आने वाले पानी में दुर्गंध आती है। पानी का रंग पीला होता है।
नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में पाइप लाइन से जलापूर्ति होती है। विशेषज्ञों के अनुसार पेयजल के लिए 150 से 300 टीडीएस उपयुक्त माना जाता है। नगर में 69 वर्ष पुरानी जर्जर पाइपलाइन के सहारे लोगों के घरों तक जलापूर्ति की जा रही है। दर्जनभर से अधिक मोहल्लों में पेयजल पाइपलाइन के बिल्कुल सटकर ही सीवर लाइन भी बिछाई गई है। कई स्थानों पर नाले और नालियों को क्रॉस करते हुए पाइपलाइन गुजारी गई है।
दूषित पानी से दर्जनों लोग पहले बीमार हो चुके हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अब तक सचेत नहीं हुए हैं। जानकारी के अनुसार आजमगढ़ नगरपालिका ने वर्ष 1956 में नगर के मध्य क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाई थी। बाद में नगर के विस्तारित क्षेत्रों में भी इसी पुरानी व्यवस्था से जोड़ते हुए पाइपलाइन डाली गई। मुख्य सड़कों के किनारे से गुजर रही पाइपलाइन को घरों से जोड़ने के लिए कई जगह नाले और नालियों के बीच से गुजारा गया, वहीं अनेक स्थानों पर सीवर और पेयजल पाइपलाइन साथ-साथ बिछा दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है, वह अक्सर फट जाती है। कभी केबल या अन्य कार्यों के लिए की जा रही खुदाई के दौरान पाइप क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसके चलते नालियों और सीवर का पानी पाइपलाइन के सहारे घरों तक पहुंच जाता है। शिकायत के बाद भी समय पर मरम्मत नहीं होती। नगर के पांडेय बाजार, बाज बहादुर, गुलामी का पुरा, दल सिंगार, कुंदीगढ़, कोट, मुकेरीगंज और हीरापट्टी में नाली और नाले के साथ ही पेयजल की पाइप लाइन बिछाई गई है।
हर महीने नगर पालिका के जलकल विभाग में 35 से 40 सिर्फ लीकेज की शिकायतें पहुंचती हैं, यानि हर दिन एक या दो शिकायतें पाइप लाइन में लीकेज की होती हैं। वहीं हर 15 दिन में कम से कम एक शिकायत गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर होती है।
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मुबारकपुर में दूषित पानी से हुई थी 20 मौतें
नगरपालिका परिषद मुबारकपुर में वर्ष 2021 में दूषित पानी से डायरिया फैला था, इसमें करीब 20 लोगों की मौत हो गई थी। पुरारानी समौधी मोहल्ले से शुरू हुआ संक्रमण पूरे कस्बे में फैल गया था और लगभग 500 लोग बीमार पड़े थे। इसके बावजूद आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। मुबारकपुर-शाहगढ़ मार्ग स्थित पुरारानी समौधी मोहल्ले में पिछले एक महीने से पाइपलाइन में लीकेज है, जिससे पानी सड़क पर बह रहा है और गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। मोहल्लेवासियों की कई शिकायतों के बाद भी मरम्मत नहीं कराई गई। चार वर्ष पूर्व अतरौलिया नगर पंचायत में भी पाइपलाइन के सहारे नाले का दूषित पानी सप्लाई होने से करीब 250 लोग बीमार हो गए थे। इसी तरह नरौली मोहल्ले में दो वर्ष पहले दर्जनभर लोग दूषित पानी से डायरिया का शिकार हुए थे।
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कुंदीगढ़ में 2016 में हुई थी दूषित पानी की आपूर्ति
नगर के पांडेय बाजार कर्बला मैदान, कुंदीगढ़ में पांच मई 2016 की सप्लाई के पानी के साथ नाली का दूषित पानी भी लोगों के घरों तक पहुंच गया था। जिससे डेढ़ दर्जन लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे उनका इलाज कराया गया था। इसके बाद भी नगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों का ध्यान इस ओर नहीं है।
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हमारे पास हर महीने लीकेज की 40 और गंदे पानी के आपूर्ति की दो से तीन शिकायतें आती हैं। जहां से शिकायत आती हैं उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाता है। हीरापट्टी में पाइप लाइन के काफी नीचे होने की शिकायत थी उसे बदलवाया जा रहा है। सिधारी में भी शिकायतें हैं इसके लिए प्रस्ताव बन गया है जल्द टेंडर जारी होगा।
शशांक पांडेय, जई जलकल।
18 डीएवी कांशीराम कालोनी में नाली से होकर गुजरा पाइप। संवाद