तहबरपुर। ब्लाक में बना कर्मचारियों का आवास खंडहर में तब्दील हो गया है जिसके कारण कर्मचारी निजी भवनों में रहने को मजबूर हैं। आसपास गंदगी का अंबार है। कर्मचारियों का आवास न होने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहा है। सरकार विकास के तमाम कार्य करा रही है लेकिन इस विकास कार्य को गति देने वाले कर्मचारियों पर किसी ध्यान नहीं जा रहा है। वर्ष 1958 मे तहबरपुर को ब्लाक घोषित किया गया था। 1958 से1 962 तक ब्लाक के प्रथम ब्लाक प्रमुख रहे हरिहर प्रसाद राय के आवास में कार्यालय चला। इसके बाद वर्ष1962-/63 मे विकास खण्ड कार्यालय व कर्मचारियो के रहने के लिए आवासो का निर्माण शुरू हुआ।
आवासों का निर्माण होने के बाद कर्मचारी रहने लगे। बीच- बीच में आवासों का मरम्मत भी होता रहा। कुछ समय तो आवास ठीक रहा। देखरेख के अभाव में कर्मचारियो के आवास जर्जर हो गए। आवासों की छत व दीवारे टूट गयी है। भवन के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है जो बिषैले जीव जन्तुओं का बसेरा बन गया है। बता दें कि इसी आवास में आगनबाड़ी कार्यालय व गोदाम भी था। भवनो के जर्जर और जानलेवा हो जाने के कारण कर्मचारियों को निजी भवनो का सहारा लेना पड़ रहा है। यही नही परिसर में पानी/शौचालय/सुरक्षा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। कर्मचारियो के परिसर में न रहने के कारण बिकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। आवास की समस्या के कारण कुछ कर्मचारी जहां शहर में मकान लेकर रहते हैं तो वहीं कुछ कर्मचारी अपने घरों से ही आते-जाते हैं। तहबरपुर की बीडीओ पुष्पा सोनकर ने बताया कि अभी बजट की कमी है इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलते ही आवास का काम शुरू कर दिया जाएगा।