अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्रमंच के तत्वावधान में बुधवार को गांधी पीजी कालेज मालटारी में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने 'हमारी शिक्षा हमारा भविष्य' विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
राहुल कुमार ने कहा कि प्राचीन काल में हमें शिक्षा के लिए सिर्फ गीता, कुरान, वेद पुराण पढ़ने के लिए दिए जाते थे। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद उद्योगों से संबंधित शिक्षा दी जाने लगी। राजसत्ता को जैसी आवश्यकता पड़ी वैसी शिक्षा दी। लेकिन आज शिक्षा को बाजार के हवाले कर दिया गया ऐसे में गरीब लोग शिक्षा नहीं पा सकते। डॉ. मुहम्मद हसीन खां ने कहा कि हम राजसत्ता की नीतियों से बंधे हैं। जैसी शिक्षा हम देना चाहते हैं वैसी शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। डॉ. कौशलेंद्र मिश्रा ने कहा कि वास्तव में शिक्षा जो होनी चाहिए वह हमारे बीच से गायब है। आज हम मूल्यपरक शिक्षा से दूर हैं। हम क्यों पढ़ रहे हैं हमें खुद नहीं पता है। हमारे खिलाफ कुछ लोगों की साजिश है जो हमारी शिक्षा व्यवस्था को घुमा रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए डॉ. रामअवध यादव ने कहा कि आज शिक्षा को बाजार के हवाले कर मुनाफा कमाया जा रहा है। जिस पर बड़े-बड़े पूंजीपतियों का कब्जा है। हमें इसके लिए स्वयं जागरूक और दूसरों को भी सचेत करना होगा। सुरेश दा, गुलशन, राकेश यादव आदि उपस्थित थे।