जिले में अधिकृत रूप से पटाखे बनाने का कार्य तो नहीं होता, लेकिन आबादी में स्थित पटाखे के गोदामों में से अधिकतर में मानक के अनुसार अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के आबादी वाले इलाकों में पटाखे की अवैध रूप से दूकानें चल रही हैं। अगर इन स्थानों पर आग की घटना हुई तो भारी नुकसान हो सकता है लेकिन अग्निशमन विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। न ही पुलिस और जिला प्रशासन को इसकी खबर है। जिले में पटाखे के कुल 29 अधिकृत गोदाम हैं।
दीपावली के मौके पर जिले में भारी मात्रा में पटाखे की खपत होती है। अधिकतर व्यापारी वाराणसी से कम और तेज आवाज वाले पटाखों को लाकर बेचते हैं। दीपावली से पहले डीएवी के मैदान पर दूकानें लगवाता है जहां अग्निशमन दल की भी व्यवस्था होती है। इसके बाद भी कई स्थानों पर पटाखे की दूकानें अनधिकृत रूप से लगती हैं, जिसकी जानकारी फायर विभाग को नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पटाखों के कई कारोबारी ऐसे हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है लेकिन पटाखे रखते और बेचते हैं। दीपावली पर इसकी खपत बढ़ जाती है। पटाखों के अधिकृत गोदामों में से अधिकतर में अग्निशमन की व्यवस्था नहीं है। चोरी छिपे चलने वाले गोदामों और दूकानों में अग्निशमन के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे आग की घटना होने पर नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे गोदाम शहर और लालगंज बाजार में स्थित हैं। वहीं कई जगहों पर चोरी छिपे पटाखे बनाने का काम भी हो रहा है। इस तरह किसी भी अधिकारी का ध्यान इस तरफ नहीं जाता, न ही ऐसे लोगों की पहचान के लिए कभी कोई अभियान ही चलाया गया। विभागीय लापरवाही का परिणाम है कि जिले के कुल 29 लाइसेंस धारकों की दूकानें भी घनी आबादी के बीच में चल रही हैं।
इनके यहां न तो आग लगने के बाद बचाव के बेहतर उपाय हैं, ना ही कभी कोई अधिकारी ही जांच पड़ताल करता है। पुराने मामलों पर गौर करें तो तीन वर्ष पूर्व पवई थाने के खैरुद्दीनपुर गांव में चल रहे अवैध पटाखे को गोदाम में विस्फोट होने से तीन लोग झुलस गए थे। यह मामला विस्फोट होने के बाद भले ही सार्वजनिक हो गया लेकिन कई ऐसे गोदाम दबे पड़े हैं। जिनकी किसी को भनक तक नहीं।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह का कहना कअवैध तरीके से संचालित पटाखों की दूकान और गोदाम के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई करती है। विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के बाद लाइसेंस जिला प्रशासन की ओर से जारी किया जाता है। अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह लाइसेंस धारकों के यहां अग्निशमन उपकरण लगे हैं या नहीं। उपकरण न होने पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को अवगत कराया जाता है।