गांव की आबादी की जमीन पर अपना मकान बनाकर रह रहे लोगों को सरकारी अभिलेखों में मालिकाना हक दिया जा रहा है। इसके लिए जनपद में हवाई मानचित्र बनाने के लिए ड्रोन सर्वे का कार्य शुरू हो चुका है। अब तक 1263 गांवों का ड्रोन के जरिए हवाई सर्वे पूरा कर लिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की जमीन पर अपना मकान बनाकर रह रहे गरीबों की जमीन पर दबंग अपनी निगाह गड़ाए रहते थे। जिसे देखते हुए सरकार ने स्वामित्व योजना शुरू की। इस योजना के तहत आबादी की जमीन पर मकान बनाकर रहने वालों को उनके मकान का मालिकाना हक देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत गांव की आबादी की जमीन का चिन्हांकन कर ड्रोन कैमरे के माध्यम से उसका सर्वे किया जाता है। फिर उस सर्वे में ड्रोन कैमरे द्वारा बनाए गए मानचित्र पर राजस्व कर्मी घर जाकर सर्वे कर उसके मकान मालिक का नाम दर्ज करते हैं फिर घरौनी तैयार की जाती है। उस पर लोगों से दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाती हैं फिर उनका निस्तारण करने के बाद घरौनी दी जाती है। इस योजना के तहत जनपद में अब तक 1263 गांवों का ड्रोन सर्वे कर हवाई मानचित्र तैयार कर लिया गया है। इतना नहीं अब तक जिले के 77 गांवों में घरौनी का वितरण भी कर दिया गया है।
घरौनी बनने के बाद किसान अपने घर को बैंक आदि में रखकर उस पर लोन आदि लेकर कोई कार्य कर सकेंगे। जबकि पहले ऐसा नहीं होने से ग्रामीण और किसान चाहकर भी लोन आदि नहीं ले पाते थे जिसके कारण उन्हें अपनी जमीनों को बेचना पड़ता था। लेकिन अब वह अपनी जमीन को बैंक में गिरवी रखकर जरूरत के हिसाब से पैसा ले सकेंगे।
मुख्य राजस्व अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि जनपद में ड्रोन से हवाई मानचित्र तैयार करने के कार्य लगभग एक वर्ष पहले से चल रहा है। यह कार्य स्वामित्व योजना के तहत शुरू किया गया था। अब तक 1263 गांवों का ड्रोन सर्वे कराकर मानचित्र तैयार कर लिया गया है। जबकि 77 गांवों के लोगों में घरौनी का वितरण हो चुका है।