बलरामपुर। मंडलीय जिला अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाने के लिए पर्चा भले ही एक रुपये का बन रहा हो, लेकिन दवाएं बाहर की लिखने की वजह से मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मजबूरी में मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। इसके लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1000 मरीज दिखाने के लिए आते हैं। मंगलवार को भी अस्पताल में 990 मरीज आए थे। इनमें से बड़ी संख्या में मरीज उल्टी, दस्त, खांसी, जुकाम के साथ ही त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे। मरीजों ने लाइनों में लगने के बाद और एप के जरिये पर्चा तो एक रुपये में डॉक्टर को दिखवाने के लिए बनवा लिया था, लेकिन डॉक्टर को दिखाने पर उन्हें कुछ दवाएं अस्पताल की तो कुछ दवा बाहर की लिख दी गईं। ऐसे में मरीजों को बाहर निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं लेनी पड़ रही हैं। डॉक्टर इन दवाओं को लिखने के लिए पर्चे के अलावा एक अन्य छोटी से पर्ची का उपयोग करते हैं, ताकि उनका कोई रिकॉर्ड न रहे। वहीं अस्पताल परिसर में ही शासन के निर्देश पर जन औषधि केंद्र खुले हैंं, जहां जेनरिक दवाएं मिलती हैं। जो काफी सस्ती होती है, लेकिन जन औषधि केंद्र की दवाएं चिकित्सकों द्वारा लिखने की बजाए बाहर की दवाएं लिखी जा रही है। अगर किसी मरीज ने गलती से यहां से दवाएं ले ली तो उसे वापस करा दिया जाता है।
चिकित्सक को दिखाने के लिए आए थे। उन्होंने कुछ दवाएं तो अंदर की लिखीं, जो फ्री में मिल गईं, लेकिन जो दवाएं बाहर की थी उन्हें लेने में 790 रुपये खर्च हो गए।-समोध यादव, सम्मोपुर।
चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने एक कुछ दवाएं सरकारी पर्चे पर लिखी और उसके साथ एक छोटी पर्ची पकड़ा दी। उनके बगल में कई लोग बैठे थे। उन्होंने हमसे कहा कि बाहर से दवा लेकर आना। जिसे लेने में 200 रुपये खर्च हो गए।-राधे श्याम सिंह, रौनापार।
मंडलीय जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाएं हैं। बाहर की दवाओं के लिखने पर सख्त मनाही है। कौन डॉक्टर लिख रहा है, उसकी पर्ची उपलब्ध कराइए। उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ।