जिले के कद्दावर नेताओं में शुमार और मुलायम के करीबी माने जाने वाले बलराम यादव को माध्यमिक शिक्षा मंत्री के पद से बर्खास्त होने से सियासी हलचल बढ़ गई है। इस कार्रवाई की वजह पार्टी में मऊ विधायक मुख्तार अंसारी को शामिल कराने की उनकी पैरवी को बताया रहा है। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पार्टी के अन्य कद्दावर सकते में आ गए हैं वहीं बलराम यादव के समर्थकों में निराशा है। उनका मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ सकता है।
पूर्वांचल में बलराम यादव की गिनती समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में होती है। अतरौलिया क्षेत्र में अपनी बिरादरी के अलावा अन्य लोगों में उनकी गहरी पैठ है। सपा मुखिया की करीबी की वजह से ही बिना चुनाव लड़े ही उन्हें सरकार में कई महत्वपूर्ण पद सौंपे गए। आजकल वह माध्यमिक शिक्षा मंत्री थे। इसके पूर्व वे पंचायती राज मंत्री और कारागार मंत्री की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। अतरौलिया क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
वर्तमान में उनके पुत्र डा. संग्राम यादव इस क्षेत्र से विधायक हैं। अभी हाल ही में पार्टी ने उन्हें एमएलसी बनाया है। सूत्रों की मानें तो बलराम यादव ने मुख्तार अंसारी को पार्टी में शामिल करने के लिए पैरवी तो की पर इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को कोई जानकारी नहीं दी। बलराम यादव को मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने से उनके समर्थकों में निराशा है।