आजमगढ़। जल संरक्षण को लेकर बड़े दावों के साथ शुरू की गई अमृत सरोवर योजना अब जमीनी हकीकत में सवालों के घेरे में है। जिले की 1811 ग्राम पंचायतों में तालाबों और पोखरों को विकसित कर जल स्तर सुधारने की योजना थी। वह अब अधूरी योजनाएं और कागजी प्रगति में उलझता दिख रहा है। क्योंकि बारिश अपने आखिरी पड़ाव तक पहुंच गई है और अभी तक अमृत सरोवरों में पानी नहीं भर सका है।
2022 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य था कि हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक एकड़ क्षेत्रफल में अमृत सरोवर का निर्माण हो, जिससे बारिश जल का संचयन कर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके। विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में अब तक सिर्फ 471 अमृत सरोवर ही पूरी तरह बन पाए हैं और 253 सरोवरों का काम अभी जारी है।
पानी का प्रवेश और निकास द्वार नहीं : चिंता की बात है कि 1087 सरोवरों पर अभी तक काम शुरू ही नहीं हुआ है। कई सरोवर ऐसे हैं जिनमें इनलेट और आउटलेट की व्यवस्था नहीं है। प्रवेश और निकास द्वार के अभाव में बारिश का पानी भी इन सरोवरों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजतन, मानसून के दौरान भी ये सरोवर प्यासे रह गए हैं। ऐसे में योजना के जल संरक्षण के मूल उद्देश्य पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है।
रानी की सराय विख के गांडूई और रघुनाथपुर में बने अमृत सरोवर बदहाल
रानी की सराय विकास खंड के गांडूई और रघुनाथपुर में बने अमृत सरोवरों में थोड़ा सा पानी है। इसके बाद पूरा क्षेत्र घास फूस से पटा है। पड़ताल के दौरान कहीं भी इनलेट और आउटलेट की व्यवस्था नहीं नजर आई। अगर हुई भी हो तो बड़ी झाड़ियों में छिपी होगी।
झाड़ झंखाड़ से पटा इब्राहिमपुर का अमृत सरोवर
ब्लॉक सठियांव की ग्राम पंचायत इब्राहिमपुर में 25 लाख 35 हजार रुपये से बने डाक्टर भीमराव आंबेडकर अमृत सरोवर के चारों तरफ मार्ग इंटरलाॅकिंग कराया गया है। सरोवर में सीढ़ी का निर्माण भी कराया गया है।
पड़ताल में देखा गया कि यहां पर साफ सफाई व्यवस्था नहीं है जबकि इसके चारों तरफ झाड़ झंखाड़ बड़ी बड़ी घास से सरोवर पटा है। इस प्रकार सठियांव विकास खंड के अन्य ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर में कहीं कहीं पर बारिश का पानी भरा और कहीं पर पानी ही नहीं है।
27 : रानी की सराय नदौली ग्राम सभा के रघुनाथपुर गांव के अमृत सरोवर में भरा कीचड़ृ। संवाद- फोटो : संवाद