आजमगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र के महराजगंज ब्लाक का सेमरी गांव भी बाढ़ की विभिषिका से ग्रसित था। लेकिन प्रशासन ने इस गांव के ग्रामीणों की कोई सुधि नहीं ली और ना ही इन्हें राहत पैकेट उपलब्ध कराया। अमर उजाला ने जब 10 सितंबर और 11 सितंबर के अंक में इस खबर का प्रकाशन किया तो मंगलवार को तहसील प्रशासन गांव के 115 लोगों में आपदा राहत पैकेट का वितरण करने पहुंच गया।
बताते चलें कि सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र के 134 गांवों को घाघरा की बाढ़ का कहर झेलना पड़ रहा था। इसमें महाराजगंज ब्लाक का सेमरी गांव में शामिल था। प्रशासन अन्य गांव में तो राहत सामग्री का वितरण करता रहा लेकिन इस गांव में प्रशासन की ओर से कोई आपदा राहत पैकेट नहीं बांटा गया।
गांव के प्रधान और अन्य ग्रामीण राहत सामग्री के लिए तहसील मुख्यालय का चक्कर काटते रहे। खबर का प्रकाशन होने के बाद मंगलवार को एक पखवारे के बाद तहसील प्रशासन आपदा राहत पैकेट के साथ कुड़ही ढ़ाले पर पहुंचा। आपदा राहत पैकेट में 10 किग्रा आटा और 10 किग्रा आलू रखा था।
जैसे ही नायब तहसीलदार, लेखपाल चंद्रभूषण, कोटेदार सीताराम ने सेमरी गांव निवासी हरिराम, रामधनी और छोटे लाल को आपदा राहत पैकेट पकड़ाया। उसमें सड़ा हुआ आलू देख ग्रामीण भड़क गए और नारेबाजी करने लगे। ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने और सामान लेने से इंकार कर दिया। तहसीलदार सगड़ी पीके राय के यह कहने पर कि सभी को आपदा राहत का पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा।
बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों ने धरना और प्रदर्शन को समाप्त किया। ग्राम प्रधान दशरथ निषाद ने बताया कि तहसील प्रशासन को 180 बाढ़ पीड़ितों की सूची सौंपी गई थी। जिनका आज वितरण होना था। लेकिन इन लोगों द्वारा सड़े गले आलू देने से लोग नाराज हो गए।
इस मौके पर रविंद्र, धर्मेंद्र, रामसकल, अमरजीत, चंद्रजीत, लालजी, दिनेश, सुरेश, रामअधार, सिंगारी देवी, सोनमती, कलावती देवी, मेवाती, सरस्वती, सोना, गीता, गुड्डी, चांदमारी, गुड़िया, सोनमती आदि लोग उपस्थित रहे।