सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर घाघरा नदी के किनारे बसे गांव देवारा खास राजा के मुराली का पुरवा में 2016 में घाघरा की कटान से पांच किसान बेघर हो गए। करीब 24 किसानों का जमीन कटकर घाघरा की धारा में विलीन हो गई। जमीन की मांग को लेकर कटान पीड़ितों ने शनिवार को समाधान दिवस पर रौनापार थाने पर प्रदर्शन किया। पीड़ितों ने आशियाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई।
बताते चलें कि मुराली का पुरवा गांव के रामचंद्र, रामाधार, रामआसरे पुत्रगण गया, तीरथ पुत्र बलिकरन और राम अवध का घर घाघरा नदी में विलीन हो गया। उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला और ना ही जमीन मुहैया कराई गई। यह लोग मड़ई डालकर इधर-उधर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रामचंद्र नदी के किनारे ही अपना आशियाना बनाए हुए हैं तो रामाधार राम आश्रय पुत्र गया खरैलिया ढ़ाले के पास मड़ई डालकर अपने बच्चों के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
महुला गढ़वल बांध से सटे खरैलिया के पास बुढ़ापे में गया चारपाई पर लेटे हुए किसी तरह से भोजन कर पा रहे है। दो वक्त की रोटी की तलाश में है। गया का कहना है कि रोटी के जहां लाले पड़े हैं वही अभी तक हमें न जमीन मिली और नहीं मकान बनाने का मुआवजा मिला। तीरथ पुत्र बलकरन बिसरा थाना गोला गोरखपुर में मड़ई डालकर निवास कर रहे हैं। राम अवध कटान से हटकर नदी के किनारे ही अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
आलम यह कि उनके परिजन न चैन से खा रहे हैं और ना ही सो पा रहे हैं। वहीं जमीन न मिलने से नाराज कटान पीड़ितों ने शनिवार को रौनापार थाने में आयोजित समाधान दिवस प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उपस्थित रामचंद्र का कहना है कि करीब एक साल घाघरा की कटान हुए हो गया। हम सबका घर घाघरा नदी में विलीन हो गया। अब तक हमें मुआवजा और जमीन नहीं दी गई। हम विस्थापित दर-दर भटक रहे हैं।
समाधान दिवस हो या तहसील दिवस, फरियाद लेकर अधिकारियों के यहां पहुंचते हैं पर हम को अनसुना कर दिया जाता है। मौके पर राम चंदर, लाल बहादुर, कन्हैया, अयोध्या, जय प्रकाश, देवकी, विनोद राय, इंद्रदेव, पलक धारी आदि उपस्थित थे।