आजमगढ़। बौद्ध पुरातात्विक विरासतों के संरक्षण और दीक्षाभूमि के सर्वांगीण विकास की मांग को लेकर मंगलवार को बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। कार्यकर्ताओं ने बौद्ध धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक विरासतों के संरक्षण की मांग उठाई।
संगठन के जिलाध्यक्ष / संयोजक सुभाषचंद्र बोस ने कहा कि दीक्षाभूमि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था और प्रेरणा का केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पार्किंग, ठहरने, शौचालय और अन्य सुविधाओं की कमी से परेशानी होती है। इसके लिए दीक्षाभूमि के सर्वांगीण विकास को अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में बोधगया टेंपल एक्ट-1949 को निरस्त करने, नागपुर में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध एवं पालि विश्वविद्यालय की स्थापना करने तथा नागपुर के अडम स्तूप और भंडारा जिले के पवनी स्तूप को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से संरक्षित कराने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि बौद्ध विरासतों के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। यह प्रदर्शन आंदोलन के तीसरे चरण के तहत किया गया। आगामी 19 अक्तूबर को नागपुर में राष्ट्रीय स्तर की सभा प्रस्तावित है। संवाद