लाटघाट। विगत दो दिनों से घाघरा के जलस्तर में लगातार घटाव हो रहा है। जिसके कारण तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन नदी द्वारा तेजी से किसानों की उपजाऊ कृषि योग्य भूमि को काटकर अपने आगोश में लेती जा रही है। लोगों का कहना है कि नदी जब घटती है तो कटान तेज करती है। शुक्रवार को एसडीएम सगड़ी गौरव कुमार ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा किया और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के तेवर दो दिनों से नरम पड़ गए हैं। नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बाद अब घटने लगा है। बाढ़ खंड ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी का पूर्वानुमान दर्ज किया है। नदी के रुख में नरमी के बाद बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। उधर, जलस्तर में कमी के साथ तटवर्ती क्षेत्रों में कटान हो रही है। कृषि योग्य उपजाऊ भूमि कट कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है। इससे लोग चिंतित हैं। लेकिन घटते जलस्तर से क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को एसडीएम सगड़ी गौरव कुमार ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या 134 है जिसमें 50 गांव गैर आबाद हैं। 10 बाढ़ चौकियां है जिसमें दाम महुला, गांगेपुर, हाजीपुर, जमुवारी, देवारा इस्माइलपुर, हैदराबाद, कुड़ही, शिवपुर, सहदेवगंज, नौबरार देवाराम जदीद किता प्रथम में अस्थाई 20 राहत शिविर बनाए गए हैं। कोविड को दृष्टिगत रखते हुए 45 नवसृजित आश्रय स्थल बनाए गए हैं। प्रत्येक रात शिविर में राजस्व कर्मी की ड्यूटी लगाई गई है। 280 नाव की व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित प्रत्येक गांव के संभ्रांत व्यक्ति का नाम व मोबाइल नंबर लिया जा चुका है। जिससे बाढ़ के समय स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए वालंटियर का चुनाव किया जा सके। आकस्मिक स्थिति में राहत व बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए हेली पैड निर्माण स्थल का चयन करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सहदेवगंज, औघड़गंज, गांगेपुर में अस्थाई बाढ़ चौकियों का निर्माण कराया गया है। दो दर्जन से अधिक स्कूल को बाढ़ राहत शिविर के लिए चयनित किए गए हैं।