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सात करोड़ के अनियिमित भुगतान में आजमगढ़ सीवीओ भी फंसे

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आजमगढ़। सदर तहसील के गंभीरवन में निष्प्रयोज्य और विवादित भूमि के लिए सात करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान की जांच पूरी होने के बाद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा गया है। वहीं, दोषी लिपिक के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के लिए सीआरओ को निर्देशित किया गया है। वहीं, हाईकोर्ट में चल रहे प्रकरण की पैरवी के लिए डीजीसी सिविल के वार्ता कर पैरवी करने के लिए डीएम ने निर्देश दिए हैं।
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सपा सरकार में सदर तहसील के गंभीरवन में वेटनरी महाविद्यालय के निर्माण का निर्णय लिया गया। लंबे-चौड़े इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके लिए 20 करोड़ से ज्यादा की धनराशि भी मिली थी। भुगतान के समय हुई जांच में पता चला कि यहां जमीन में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई है। ग्राम सभा की भूमि को अपने नाम करा लिया गया है। इस कारण तत्कालीन जिलाधिकारी सुहाष एलवाई ने भुगतान पर रोक लगा दी थी। किसान इसेक खिलाफ हाईकोर्ट भी गए थे। इसके बाद वर्ष 2017 में इस प्रोजेक्ट के भी अन्य जिले में स्थानांतरित होने की बात कह दी गई। तभी से मामला ठप पड़ा था। प्रोजेक्ट स्थानांतरित होने के बाद भी गत वर्ष तत्कालीन डीएम के आदेश को छिपा कर विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के कर्मचारियों ने निष्प्रयोज्य भूमि का अनियमित तरीके से लगभग सात करोड़ रुपये का भुगतान करा दिया था। इस बीच शासन की ओर से भूमि खरीद के लिए भेजी गई धनराशि वापस मांगी गई। इस पर किसानों के खाते से धनराशि वापस ली जाने लगी। किसान इसके विरोध में फिर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने धनराशि वापस लेने पर रोक लगा दी। अमर उजाला ने इस प्रकरण को प्रमुखता के साथ उठाया था। जिलाधिकारी ने मामले की जांच सीडीओ आनंद शुक्ला को सौंपी थी। साथ ही आरोपी लिपिक के खिलाफ चार्जशीट भी जारी की गई थी।
मुख्य विकास अधिकारी की जांच रिपोर्ट में विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के लिपिक आनंद मिश्रा के साथ ही जनपद के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीके सिंह को भी दोषी पाया गया है। जिलाधिकारी ने सीवीओ पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। साथ ही विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के लिपिक आनंद मिश्रा पर विभागीय एवं अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मुख्य राजस्व अधिकारी हरिशंकर को पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही भगुतान की गई धनराशि को वापस लेने के लिए शासकीय अधिवक्ता सिविल से राय लेकर हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सीडीओकी रिपोर्ट में एसएलओ दफ्तर को लिपिक आनंद मिश्रा के साथ ही सीवीओ डॉ. वीके सिंह को दोषी बताया गया था। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के खिलार्फ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव के पत्र लिखा गया है। लिपिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीआरओ को निर्देशित किया गया है। - एनपी सिंह, जिलाधिकारी
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