जिला अस्पताल में बंद पैथालोजी।
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आजमगढ़। मंडलीय अस्पताल में जांच के लिए संचालित पीपीपी मॉडल पैथालॉजी व्यवस्था समाप्त हो गई है। जिसके चलते जांच के लिए मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मंडलीय अस्पताल की पैथालॉजी की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। वर्तमान में कोरोना वायरस को लेकर उहापोह की स्थिति मची हुई है। ऐसे में शासन पीपीपी मॉडल पैथालॉजी व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाना अस्पताल प्रशासन के लिए भारी पड़ रहा है।
मरीजों को नि:शुल्क सभी प्रकार के जांच की सुविधा देने के उद्देश्य को लेकर प्रदेश स्तर से मंडलीय अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत पैथालॉजी स्थापित की गई थी। हर छोटी से बड़ी जांच की सुविधा इस पैथालॉजी पर मरीजों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध थी। लखनऊ की पीओसीटी सर्विसेस कंपनी को इसका कांट्रेक्ट मिला था। जरूरी मशीने सरकार ने इस फर्म के माध्यम से स्वयं क्रय किया था लेकिन उसे संचालित फर्म के कर्मचारी कर रहे थे। फर्म ने यहां आठ कर्मचारी तैनात कर रखे थे। इस व्यवस्था के शुरू होने से मंडलीय अस्पताल पर आने वाले मरीजों को काफी सहुलियत मिल रही थी। सभी छोटे से बड़ी जांच की सुविधा मरीजों को नि:शुल्क मिल रही थी। फर्म का कांट्रैक्ट फरवरी में ही समाप्त हो गया। शासन ने अनुबंध बढ़ाने के बजाए पत्र भेज कर कर्मचारियों को हटाने का निर्देश जारी कर दिया। 10-11 मार्च तक फर्म के कर्मचारी इस उम्मीद में काम कर रहे थे कि कांट्रैक्ट बढ़ जायेगा लेकिन 13 मार्च को पुन: शासन ने फर्म के कर्मचारियों को हटाने का रिमाइंडर भेज दिया। इसके बाद से फर्म के कर्मचारी नहीं आ रहे है और अस्पताल की पैैथालॉजी व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अस्पताल के खुद के मात्र दो एलटी व एक एनआरएचएम के संविदा एलटी के भरोसे पैथालॉजी का संचालन किया जा रहा है। मरीजों के साथ ही उक्त कर्मचारी भी लोड के चलते परेशान है। अस्पताल प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
सुविधा बढ़ाने के बजाए घटा रहा शासन
आजमगढ़। वर्तमान में कोरोना को लेकर दहशत व्याप्त है। ऐसे में लगातार स्वास्थ्य महकमें को शासन स्तर से अलर्ट किया जा रहा है। आईसोलेशन वार्ड के साथ क्वारंटाइन सेंटर बनाये जा रहे है। इस बीच पीपीपी मॉडल के पैथालॉजी को बंद किये जाने पर सवालियां निशान खड़े हो गये है। अस्पताल के कर्मचारी ही नाम न छापने की शर्त पर कहते है कि वर्तमान में सुविधाएं बढ़ायी जानी चाहिए लेकिन सरकार सुविधाओं को घटा रही है। पीपीपी मॉडल के पैथालॉजी को वर्तमान में चालू किया जाना अत्यंत ही आवश्यक है। ताकि कोरोना अथवा मलेरिया, टायफाइड आदि की जांच आसानी से हो सके।
जिस कंपनी का कांट्रैक्ट था वह फरवरी में समाप्त हो चुका है। बढ़ाये जाने के लिए शासन को पत्र भेेजा गया है। यदि कांट्रैक्ट बढ़ता है तो बेहतर होगा अन्यथा की स्थिति में अस्पताल के एलटी के माध्यम से सामान्य जांचे करायी जाएंगी। - डॉ. एसकेजी सिंह, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल।