पितृ विसर्जन पर शनिवार को जिले भर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण कर पूर्वजों को याद किया। उनकी आत्मा की शांति और आशीर्वाद की कामना के साथ श्राद्ध कर्म संपन्न कराए।
इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद यथाशक्ति दान-दक्षिणा दी गई। नगर के प्रमुख घाटों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के पोखरों और तालाबों तक सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
नगर क्षेत्र के गौरीशंकर घाट, राजघाट, भोला घाट और सिधारी घाट पर लोगों ने पिंडदान और तर्पण किया। परिवार के सदस्यों के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान पूरे किए। वहीं, कई लोगों ने घरों में ही पूजा-पाठ कर पूर्वजों को जल अर्पित किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी पोखरों और तालाबों के किनारे श्राद्ध कर्म किए गए। पितृ पक्ष में हजामत नहीं कराने की मान्यता का पालन करने वाले लोग पितृ विसर्जन के अवसर पर सुबह सैलून पहुंचे। किसी ने दाढ़ी बनवाई, तो कई लोगों ने मुंडन कराया। इसके चलते नाई की दुकानों पर भी भीड़ रही।
रानी की सराय स्थित रानी के पोखरे पर शनिवार को पितृ तृप्ति सामूहिक पार्वण श्राद्ध एवं तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्राह्मणों की देखरेख में श्रद्धालुओं ने पिंडदान किया।
ठेकमा : पितृ विसर्जन पर क्षेत्र में लोगों ने नदी और तालाबों के किनारे अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण और पिंडदान किया। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और जरूरतमंदों को भोजन कराकर दान-पुण्य किया।
गिरीश दत्त संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय के सेवानिवृत्त धर्माचार्य पंडित सूर्य नारायण पाठक ने बताया कि पितृ विसर्जन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ पूर्वजों के संस्कारों और आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस परंपरा का उद्देश्य है।