जनपद के मदरसों में काफी दिनों से नियुक्ति को लेकर खेल चल रहा था, लेकिन इसका खुलासा शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम की जांच में हुआ।
जांच टीम ने 18 जुलाई को जीयनपुर स्थित मदरसा अरबिया उनवारूल ओलूम का निरीक्षण किया। निरीक्षण में मदरसे में फाजिल तक शिक्षण कार्य होना पाया गया। इसके लिए मानक 15 कमरे होने चाहिए लेकिन मौके पर 12 कमरे पाए गए। जांच टीम ने तत्समय प्रचालित नियमावली के अनुसार मानक को पूर्ण पाया। जांच टीम ने छह जुलाई को नगर के जालंधरी मुहल्ला स्थित मदरसा इस्लामियां जमीयतुल कुरैश, जालंधरी का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के टीम ने मदरसे के 28 शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों में सात कर्मियों को विभागीय अनुमोदन अथवा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी स्तर से भुगतान होना पाया। शेष 21 मामले में उच्च न्यायालय के आदेश से वेतन भुगतान हो रहा है
शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों के अभिलेखों की जांच में सहायक अध्यापक फौकानिया के पद पर नियुक्त साजिदा बानों नियुक्ति के समय निर्धारित अर्हता नहीं रखती हैं। नियुक्ति के पाने के बाद साजिदा बानों ने अरबी विषय से वर्ष 2005 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। जांच टीम ने उनकी नियुक्ति को अनियमित बताया। वहीं मेंहनगर के मदरसा अफजालूल ओलूम दौलतपुर के निरीक्षण में स्वीकृत 15 पद के सापेक्ष 15 शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मी वेतन प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों की पत्रावलियों के निरीक्षण में प्रधानाध्यापक सलीम जावेद उनकी सेवा पुस्तिका उपलब्ध नहीं करा सके।
जांच के दौरान कई मदरसे ऐसे मिले जो शासन के बनाए नियमों का पालन नहीं करते हैं। वहीं लगभग 20 शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति में गड़बड़ी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन ने इन लोगों का वेतन रोक दिया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भी निर्देशित किया गया है कि जिन लोगों के खिलाफ जांच समिति ने रिपोर्ट दी है। उनके वेतन का भुगतान किसी भी हाल में न किया जाए।
- चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी।