हत्या के मामले में आरोपित दो सगे भाईयों में से एक को सुनवाई के बाद विशेष सत्र न्यायधीश जगदीश प्रसाद राजपूत ने दोषी पाया। इस दौरान उन्होंने दोषी पाए गए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये अर्थ दंड निर्धारित किया। दूसरे को संदेह का लाभ मिलने पर कोर्ट ने बा-इज्जत बरी कर दिया।
कंधरापुर थाने के किसुनदासपुर (देवखरी) गांव में पांच जनवरी 2010 को दिन दहाड़े गोली चली थी। इस घटना में देवखरी गांव निवासी शिवशंकर सिंह की हत्या हुई थी। घटना के बाबत मृतक के भाई इंद्रजीत सिंह पुत्र कलपनाथ सिंह ने थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें गांव निवासी हरिगोविंद और हरिबंश सिंह उर्फ गुड्डू पुत्रगण महंगू को आरोपित किया गया था। पीड़ित ने पुलिस को दर्ज मामले में बताया था कि हरिगोविंद सिंह के परिवार के लोग उसके खेत से अरहर की फसल काटकर ले गए थे।
इस बात की जानकारी होने पर उसका भाई शिवशंकर सिंह समझाने बुझाने के लिए आरोपियों के घर गया। जहां दोनों आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। साथ तमंचा लेकर उन्हें दौड़ा कर उन पर फायर कर दिया। गोली लगने से उनके भाई की मौके पर मौत हो गई। दर्ज रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने हरिगोविंद को कोर्ट ने दोषी पाया। इस दौरान कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास के साथ अर्थ दंड की सजा निर्धारित की। मामले में आरोपित बने हरिबंश उर्फ गुड्डू को कोर्ट ने बा-इज्जत बरी कर दिया। बहस के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडेय, राम मिलन यादव ने अपने पक्षों को रखा।