2007 से 2013 के बीच समाज कल्याण विभाग में हुए लगभग 150 करोड़ के घोटाले की जांच में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद गति आ गई है। इस मामले के एक आरोपी समाज कल्याण विभाग के लिपिक गंगा सागर राय से 31 लाख रुपये की रिकवरी की आरसी जारी कर दी गई है।
बताते चलें कि जिला समाज कल्याण विभाग और जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से वर्ष 2007 से 2013 के बीच छात्रवृत्ति, विधवा, विकलांग और क्षतिपूर्ति की धनराशि में विभिन्न तरह के कूटरचित दस्तावेज तैयारकर करीब 150 करोड़ से अधिक रुपये का घोटाला किया गया था। शिकायत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने टीम गठित कर मामले की जांच कराई।
सहायक अर्थ संख्या अधिकारी सुनील सिंह ने चार मामलों को उजागर किया, जिसमें दो करोड़ 80 लाख 66 हजार 715 रुपये का गोलमाल किया गया था। इसमें विधवा और विकलांग पेंशन की राशि विद्यालयों को दी गई थी, इसके अलावा किन्हीं कारणों से वापस आए चेकों को विद्यालय प्रबंधकों को बेचा गया था। इसकी रिपोर्ट कप्तानगंज, सिधारी और शहर कोतवाली में दर्ज कराई गई।
इसमें तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी एनएन द्विवेदी, विभाग के लिपिक गंगा सागर राय, जितेंद्र राय, संजय राय, संतोष कुमार श्रीवास्तव, नागेंद्र राय सहित विद्यालयों के प्रबंधक/प्रधानाचार्य के साथ बैंक के प्रबंधक भी आरोपित किए गए थे। इसके बाद इसकी कार्रवाई यहीं ठप पड़ गई थी।
इस बीच विधायक मेंहनगर ने मुख्यमंत्री को मामले की जानकारी दी। मुख्यमंत्री की तरफ से प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने इस गोलमाल के संबंध में जिला प्रशासन से आख्या मांगी। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में 22 मार्च को दोषी लिपिक गंगा सागर राय के खिलाफ 31 लाख 41 हजार 807 रुपये की रिकवरी की आरसी जारी कर दी गई।
कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए पत्र एसपी को भी भेजा गया है। साथ ही अधूरी जांच को आगे बढ़ाने का भी आदेश दिया गया है।
- सुहास एलवाई, जिलाधिकारी