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खुलेगा आबकारी थाना, होगा नियमों का पालन 16-17-07

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आजमगढ़। रौनापार, जीयनपुर, बिलरियागंज और मुबारकपुर में जहरीली शराब पीने से एक साथ तीस और पचास लोगों की हुई मौत के बाद आजमगढ़ का नाम सुर्खियों में था। रिपोर्ट के मुताबिक यहां आबकारी विमाग कई मायने में कमजोर और उपेक्षित मिला। इस प्रकार की स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी आबकारी विभाग की है। 27 सितंबर को कई आबकारी धाराओं में संशोधन कर उन्हें और प्रभावी बनाया गया है। नियमों को सख्त करते हुए सरकार उन नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए आबकारी थाना खोले जाने का निर्णय लिया है। इसमें आजमगढ़ भी शामिल है।
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आबकारी अधिकारी शराब तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले करते हैं। लेकिन वे कार्रवाई करने में हीलाहवाली करते हैं। बड़ा मामला हो जाने पर आबकारी विभाग को ही दोषी ठहराते हैं। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार अबैध शराब पर रोक लगाने के लिए सख्त है। 27 सितंबर को कई आबकारी धाराओं में संशोधन कर उन्हें और प्रभावी बनाया गया है। नियमों को सख्त करते हुए सरकार उन नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए आबकारी थाना खोले जाने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में जिन दस जिलों में आबकारी थाना खोले जाने का प्रावधान तैयार किया गया है। उन दस जिलों में आजमगढ़ का नाम प्रमुख है। 13 सितंबर को जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए आबकारी मंत्री जयप्रताप सिंह विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में यह जानकारी दी है। साथ ही थाना बनाए जाने के लिए भूमि का चयन आदि प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। बताया कि आबकारी थाना दस उन जिलों में खोले जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जहां शराब पीने से अधिक लोगों की मौतें हुई हैं। जिला अवैध शराब कारोबार के लिए मशहूर है।
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आबकारी थाना खुलने से विभाग को होगा फायदा
जिला आबकारी अधिकारी सुदर्शन सिंह ने बताया कि आबकारी थाना बन जाने से गिरफ्तार आरोपियों को हवालात में रखकर या रिमांड पर लेकर पुछताछ किया जा सकता है। थाने के शस्त्रागार में हम अपने शस्त्र रख सकते हैं, अन्यथा एक बार परमिशन लेकर पुलिस लाइन में रखना तो दूसरी बार परमिशन लेकर लेना पड़ता है। आबकारी अधिकारी ने बताया कि हम शराब के साथ तस्कर पकड़कर थाने में सौंपते हैं। आरोपी देने के दौरान थाना स्टाफ से काफी परेशानी भरा होता है।
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इन धाराओं को बनाया गया प्रभावी
27 सितंबर को योगी कैबिनेट ने जिन आबकारी धाराओं में संशोधन करते हुए उन्हें प्रभावी बनाया है। उसमें आबकारी एक्ट 60 (1) एक्साईज एक्ट को गैर जमानती धारा बना दिया गया। जबकि पहले थाना या आबकारी अधिकारियों से जमानत मिल जाती थी। इसी तरह से एक्साईज एक्ट 60 (2) अबैध शराब बनाते या पकड़े जाने पर भी चालान कर जेल भेजवाने का प्रावधान है। जबकि 63 एक्साईज एक्ट जहरीली शराब के साथ पकड़े जाने वाले को आजीवन कारावास का प्रावधान बनाया गया।
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मालखाने में धूल फांक रहे शस्त्र
आबकारी विभाग के निरीक्षकों को रिवाल्वर और सिपाहियों को रायफल लेकर चलने का प्रावधान है। इन्हे डीएम की तरफ से लाईसेंस दिया जाता है। लेकिन उपेक्षा के चलते इनका लाइसेंस नहीं बन पा रहा। फाइल दफ्तर में धुल फांक रही है। शस्त्र मालखाने में सड़ रहे हैं। असलहा न होने की वजह से इंस्पेक्टरों को थाना पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। असफल होने पर दोनों विभाग एक दूसरे के अधिकारी और कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराते हैं।

कोट
जिला आबकारी अधिकारी सुदर्शन सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में छह निरीक्षकों में से महज चार के पास लाइसेंस और शस्त्र है। जबकि 18 सिपाहियों में से महज तीन के पास शस्त्र लाइसें हैं। शेष लोग बगैर शस्त्र के ड्यूटी करते हैं। आवश्यकता पडने पर पुलिस लाइन के मालखाने से लेना पड़ता है। वह लंबी प्रक्रिया होती है। आबकारी थाना खुलने से तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। - सुदर्शन सिंह, जिला आबकारी, अधिकारी
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