फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हत्यारोपी को मिली उम्रकैद की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। हत्या के जुर्म में एक आरोपी को दोषी पाते हुए अदालत ने उम्र कै द की सजा सुनाई। साथ ही बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जब कि इसी मामले में आरोपी के पिता पर जुर्म साबित न होने पर अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया। शनिवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार की अदालत ने सुनाई। घटना महराजगंज थाना के भैरोदासपुर गांव की है। भैरोदासपुर गांव में रात को सोते समय रंजन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पिता रामभवन सिंह ने आठ दिसंबर 2013 को स्थानीय थाने में गांव के दो लोगों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया कि गांव के रामप्यारे सिंह और बालमकुंद सिंह से रंजीश चल रही थी। इसी रंजीश को लेकर घटना की रात निर्माणाधीन मकान में सोते समय सोनू उर्फ संदीप पुत्र राम प्यारे और बालकुंद पुत्र कपिलदेव ने धारदार हथियार से रंजन सिंह की हत्या कर दी। इस मामले में महराजगंज थाना पुलिस ने सोनू उर्फ संदीप और रामप्यारे सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव और प्राइवेट कौंसिल राजेंद्र प्रसाद सिंह ने इस मुक दमे के वादी समेत कुल आठ गवाहों को परीक्षित कराया। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद हत्यारोपी सोनू उर्फ संदीप को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
विज्ञापन


अदालत ने जारी किया वारंट
आजमगढ़। हत्या के मामले में तीन आरोपितों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रे्रट अवधेश कुमार की अदालत ने फरार होने की उद्घोषणा करते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है। मामला गंभीरपुर थाना क्षेत्र का है। गंभीरपुर थाना क्षेत्र के खरैला गांव निवासी वनबिहारी मिश्रा की 10 जून 2018 की रात रोहुआ मुस्तफाबाद मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक का भाई महेंद्र कुमार ने गांव के त्रिपुरारी मिश्रा, विद्या शंकर मिश्र, प्रमोद मिश्र, संतोष के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना के बाद त्रिपुरारी मिश्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। शेष आरोपी फरार पुलिस की पकड़ से बाहर है। मुकदमे में हो रही देरी को देखते हुए वादी मुकदमा ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शरण ली। हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि आठ सप्ताह के अंदर जांच पूरी कर दी जाय। मुकदमे की जांच कर रहे विवेचना अधिकारी ने अरोपियों को फरार घोषित किए जाने के संबंध में सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। सुनवाई के बाद अदालत ने विद्या शंकर, संतोष मिश्र और प्रमोद मिश्र के विरुद्ध दंड प्रक्रिया की धारा के तहत फरार की घोषणा करते हुए गिरफ्तारी का वारंट जारी किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें