निकाय चुनाव से पहले समाज कल्याण विभाग के 150 करोड़ के घोटाले में दोषियों पर कार्रवाई में जिस तरीके से तेजी आई थी, वहीं जांच अब टंडे बस्ते में जाती दिख रही है। पिछले माहों में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और चार पर गैंगेस्टर भी लगाया गया था। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियों के लिए कई टीमों का गठन कर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में भेजा गया था। स्कूलों और आरोपियों को नोटिस जारी कर रिकवरी की भी तैयारी कर ली गई थी। इस बीच चुनाव आने से मामला ठंडे बस्ते में चल गया। पुलिस भी सुस्त पड़ गई।
जिले में 2007-08 से 2012-13 तक समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन आदि के मद में लगभग 150 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। शिकायत के बाद 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जांच के दौरान 2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिलने पर दो थानों में चार एफआईआर कराई गई थी और तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, डीआईओएस समेत 34 लोगों को नामजद किया गया था। दो आरोपी बाबुओं और तत्कालीन बैंक अधिकारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। एक आरोपी की गिरफ्तारी पहले ही हुई थी। मामले में प्रोबेशन विभाग के तत्कालीन बाबू सुभाष चंद्र, डीसीबी कप्तानगंज के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव, समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन लिपिक संतोष कुमार श्रीवास्तव और धर्म सिंह के खिलाफ गैंगेस्टर लगाया गया था। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमों की गठन कर पूर्वांचल के जिलों में भेजा गया था।