फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्व की कमर तोड़ रहे अवैध कारोबारी

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। तमाम प्रयासों के बावजूद जिले से अवैध शराब का कारोबार समाप्त नहीं हो रहा। पुलिस एक किसी बड़े गिरोह का खुलासा कर रही तो पुन: दूसरा सक्रिय हो जा रहा। शराब के कारोबारी अपने यहां अवैध तरीके से अंग्रेजी और देशी शराब तैयार कर उसकी सप्लाई सरकारी दुकानों पर कर बेचवा रहे हैं। सेल्समैनों की मदद से सरकारी दुकान से बिकने वाली शराब की वजह से ना केवल लोगों के जान का खतरा बना है। वहीं लाखों रुपये का सरकारी राजस्व का नुकसान होने का पुलिस दावा कर रही। जबकि आबकारी विभाग के लोग पुलिस के दावों को गलत बताते हुए अधिक शराब की बिक्री होने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन

जिले में अवैध शराब का कारोबार काफी दिनों से फलफूल रहा है। इस व्यवसाय में कई सफेदपोश भी जुड़े हैं और इसके जरिए अपना बहुत बड़ा साम्राज्य भी खड़ा कर लिया है। अवैध शराब कारोबार से ही जुड़े अतरौलिया क्षेत्र के पूर्व बसपा विधायक सुरेंद्र मिश्रा के स्कूल में छापेमारी कर ना केवल भारी मात्रा में शराब बरामद की, बल्कि इस मामले में विधायक को भी गिरफ्तार कर लिया। जो वर्तमान समय में जेल में हैं। आलम यह है कि जिले में पहली बार शराब माफियाओं का अलग-अलग गैंग चिन्हित कर सदस्यों के गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनकी गिरफ्तारी कर रही है। पुलिस एक गिरोह का खुलासा कर रही तो दूसरा सक्रिय हो जा रहे हैं। ज्यादातर कारोबारी शराब की खेप पहुंचाने में लग्जरी वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इसका साफ उदाहरण महराजगंज थाने के महेशपुर गांव में स्थित पुराने सरकारी गोदाम से बरामद हुई 40 लाख रुपये की अंग्रेजी शराब से लगाया जा सकता है। इस कारोबार में लिप्त आरोपियों से हुई पूछताछ के दौरान पता चला कि यह लोग पंजाब से शराब की खेप लाकर यहां गुप्त ठिकाने पर छिपाकर रखते हैं। यहां से लग्जरी वाहनों में भरकर आजमगढ़, मऊ, अंबेडकर नगर आदि जिलों के सरकारी ठेकों पर सप्लाई कर सेल्समैनों की मदद से बेचवाते हैं। अवैध शराब बेचने से दुकान मालिक और सरकार का नुकसान होता है, लेकिन अवैध कारोबारी और सेल्समैनों की चांदी कटती है। वहीं आबकारी विभाग ने पुलिस के दावे को गलत बताया।

महराजगंज थाने के महेशपुर गांव के सरकारी गोदाम से पकड़ी गई शराब जिले के अलावा आसपास के जिलों के सरकारी दुकानों पर सप्लाई की जाती थी। इस अवैध कारोबार से सरकार का लाखों रुपये का राजस्व प्रतिमाह नुकसान होता था। कारोबरियों के गतिविधयों पर नजर रखते हुए इनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही। - नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण
विज्ञापन


हमारे सभी सरकारी और देशी शराब की दुकानों पर क्षमता से अधिक शराब बिक रही है। देशी की बिक्री 23 प्रतिशत अधिक जबकि अंग्रेजी की बिक्री 57 प्रतिशत अधिक हुई है। ऐसे में कैसे माना जाय कि सरकारी दुकानों से अवैध शराब बेची जा रही। - ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, जिला आबकारी अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें