जिला जेल में मोबाइल मिलने के मामले में सोमवार को बयान दर्ज किया गया। महाराजगंज जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक की मौजूदगी में जांच टीम ने बंदियों,बंदी रक्षकों सहित अन्य लोगों का बयान किया। जांच टीम के पहुंचने से जेल के अधिकारी और कर्मचारियों में हड़कंप मचा रहा। अमर उजाला के 11 नवंबर के अंक में (कैदियों ने वाट्सएप से भेजीं फोटो) शीर्षक से छपी खबर के बाद आईजी जेल प्रकाश चंद्र ने महराजगंज जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके सिंह को जांच सौंपकर रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक आजमगढ़ जेल में जांच करने पहुंचे थे।
सोमवार की शाम को जांच के बाद जेल से बाहर निकले वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि दीपावली के दिन जेल के भीतर अतरौलिया क्षेत्र का बंदी सचिन पांडेय द्वितीय मोबाइल चला रहा था। अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद तलाशी के दौरान जेल के भीतर से सचिन के पास से एक मोबाइल बरामद हुआ। मोबाइल जब्त कर उसके विरुद्ध सिधारी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। मोबाइल जेल में कैसे और किन परिस्थितियों में पहुंचा। इसकी जांच सिधारी थाने की पुलिस कर रही। जेल के अधिकारियों ने घटना के बाद सचिन पांडेय द्वितीय को गोरखपुर जेल में शिफ्ट करा दिया है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि इस संबंध में कई बंदी रक्षक और बंदियों का बयान रिकार्ड किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जेल के भीतर कोई मोबाइल नहीं चल रहा। इसके बाद भी यदि मोबाइल चल रहा है तो उस पर रोक लगाने का काम पुलिस करेगी। एके सिंह ने कहा कि जेल के भीतर संदिग्ध वस्तुओं की बरामदगी के लिए ही रविवार को मऊ की पुलिस से छापेमारी कराई गई थी। हालांकि कोई संदिग्ध वस्तु नहीं बरामद हुई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि अभी तो वह जेल के भीतर मोबाइल चलाने के लिए जिम्मेदार जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट आईजी जेल को सौंप देंगे। कार्रवाई उन्हीं के स्तर से किया जाएगा।