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नेताओं के संरक्षण में चल रहा शराब कारोबार

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आजमगढ़। रौनापार थाना क्षेत्र सरदौली गरथौली बुढ़ानपुर केवटहिया गांव में गुरुवार को जहरीली शराब से हुई नौ लोगों की मौत और नौ लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अक्तूबर 2013 में मुबारकपुर थाना क्षेत्र में हुई घटना की याद ताजा हो गई। जिसमें जहंीली शराब पीने से 42 लोगों की मौत हुई थी। रौनापार की घटना के बाद ना केवल मुबारकपुर की घटना की याद ताजी हो गई, बल्कि उस समय शासन को भेजी आबकारी प्रवर्तन दल के रिपोर्ट का भी मामला गरमा गया। जिसमें उन्होंने अवैध शराब के कारोबार में लिप्त लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इनके विरुद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन यह मामला भी दबा दिया गया।
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वर्ष 2013 के तात्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन दल की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट में जिन अवैध शराब के कारोबारियों का नाम शामिल था। उसमें मुबारकपुर थाना क्षेत्र के केरमां गांव के दो लोग, जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के दो और शहर के दो लोगों का नाम शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक यह कारोबारी लग्जरी वाहनों का प्रयोग कर फैजाबाद, गोरखपुर, गाजीपुर, वाराणसी आदि जिलों से शराब बनाने का शीरा (ओपी) और रेक्टीफाइड स्प्रीट जिले में लाते हैं। इसके बाद मुबारकपुर, जीयनपुर, रौनापार, जहानागंज आदि क्षेत्रों में बनाए गए अड्डों पर सप्लाई करते हैं। इसके बाद छोटे कारोबारी इन कैमिकल का इस्तेमाल कर अवैध कच्ची शराब बनाते हैं। बाद में क्षेत्रों मेें वितरित करते हैं। इन्हें कई बार रंगेहाथ पकड़ा गया। लेकिन जैसे ही पकड़े जाने की सूचना मिलती है। तभी शीर्ष नेताओं का दवाब आने लगता है। सहायक आयुक्त प्रवर्तन दल की तरफ से यह रिपोर्ट अपने विभाग के उच्चाधिकारी और जिला प्रशासन को भेजा गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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