सीएचसी बिलरियागंज पर डिलीवरी के लिए आयी महिला की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही छिपाने के लिए शव को ही महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस में लादे जाने के दौरान ही परिजनों को महिला की मौत का आभास हो गया और उन्होंने शव एंबुलेंस से उतार कर आक्रोश जताना शुरू कर दिया। अस्पताल और पुलिस प्रशासन ने महिला के शव को दबाव बना कर घर भेज दिया।
रौनापार थाना क्षेत्र के फरीदपुर केवटहिया गांव निवासी सुखिया (25) पत्नी राजकरन को डिलीवरी होनी थी। परिजन उसे सीएचसी बिलरियागंज में लाकर भर्ती कराये थे। शनिवार की रात महिला की सीएचसी पर ही मौत हो गई। महिला के मौत की जानकारी होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और और आनन फानन में शव को एंबुलेंस में लाद कर जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर करने का प्रयास शुरू कर दिया गया। महिला को एंबुलेंस में लादे जाने के दौरान ही परिजनों को इस बात का एहसास हो गया कि अब वह जिंदा नहीं है। जिस पर परिजन शव को एंबुलेंस से उतार लिए और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। देर रात हंगामा होने पर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। इसके बाद अस्पताल और पुलिस प्रशासन ने मृतका के परिजनों पर दबाव बना कर शव को घर भेज दिया। कहीं सुनवाई न होने और पुलिस के दबाव पर परिजन शव लेकर घर चले गए। मृतका के भाई जगदीश का आरोप है कि उसके बहन की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव को ही रेफर कर दिया था।
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10 दिनों से अस्पताल में नहीं है महिला चिकित्सक
गोरिया बाजार। सीएचसी बिलरियागंज पर महिला डॉक्टर के रूप में डॉ. शिल्पी आनंद की तैनाती है। लगभग दस दिनों से वह अस्पताल में मौजूद नहीं है। वह छुट्टी पर हैं अथवा बिना छुट्टी के ही गायब है, यह कोई बता नहीं पा रहा है। डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्सों द्वारा ही सीएचसी पर डिलीवरी कराई जा रही है। डॉक्टर की अनुपस्थिति के चलते ही सुखिया की मौत हुई।