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पहली जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी निलंबित बाबू पर कार्रवाई

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आजमगढ़। फोरलेन निर्माण में आई जमीन के मुआवजे में हुए 95 लाख के गबन में निलंबित अमीन योगेंद्र सिंह के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा कसने लगा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी की ओर से निलंबित अमीन के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके खिलाफ में योगेंद्र सिंह कोर्ट चले गए। अदालत ने जिलाधिकारी के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें पूर्व जांच रिपोर्ट के आधार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पर योगेंद्र सिंह को फिर से कारण बताओ नोटिस जारी की गई है।
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वाराणसी-गोरखपुर (एनएच-233) फोरलेन में बूढ़नपुर तहसील के भीलमपुर छपरा निवासी सुग्रीव की जमीन आई थी। सुग्रीव कई वर्षों से लापता था। जमीन भी उसके भाई राजकुमार पुत्र धनई के नाम वरासत हो गई थी। कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से किसी को सुग्रीव बना और अभिलेखों में हेराफेरी कर उसके नाम पर 95 लाख के मुआवजे का भुगतान ले लिया था। खाते में से भी धनराशि खर्च कर दी गई थी। अमर उजाला की ओर से मामले का खुलासा करने के बाद शहर कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर भी कराई गई थी। दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी । पुलिस की जांच के दौरान गबन में विशेष मूमि अध्यप्ति कार्यालय के अमीन योगेंद्र सिंह का नाम आने पर उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी सीबी सिंह ने निलंबित कर दिया गया था। प्रकरण की जांच तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व बीके गुप्ता को सौंपी गई थी।
जांच रिपोर्ट में उन्होंने इनकी भूमिका संदेहास्पद पाई थी। इस बीच बीके गुप्ता सेवानिवृत्त हो गए। डीएम शिवांकांत द्विवेदी ने मामले की जांच अन्य अधिकारी से कराई और योगेंद्र सिंह को दोषी पाए जाने पर उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके खिलाफ योगेंद्र सिंह कोर्ट चले गए। अदालत ने जिलाधिकारी के आदेश के रद करते हुए उन्हें पूर्व जांच रिपोर्ट के आधार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पर योगेंद्र सिंह को फिर से कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि नोटिस जारी की गई है। जवाब मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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