आजमगढ़। सरायमीर में धार्मिक टिप्पणी को लेकर शनिवार को हुए बवाल से पहले मुख्य आरोपी कलीम जामई की ओर से सोशल साइट के माध्यम से एसओ को खुली चेतावनी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि सरायमीर के लोग शनिवार को एसओ को उसकी औकात बता देंगे। पुलिस को इसकी जानकारी भी थी, इसके बाद भी पुलिस की ओर से पहले से आवश्यक तैयारी और कार्रवाई नहीं की गई। यदि पहले से धमकी देने वालों पर नकेल कसी जाती तो बवाल को रोका जा सकता था।
सरायमीर शनिवार को हुई बवाल कोई त्वरित नहीं था। बाकायदा इसकी रुपरेखा तैयार हो रही थी। पहले सोशल साइटों पर एसओ को निशाना बनाया गया। एसओ ने इसे मानहानि मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की तो माहौल खराब करने वालों ने इसे दूसरा रूप दे दिया। शुक्रवार को सोशल साइटों पर एसओ सरायमीर को खुली चेतावनी दी गई थी। ये भी कहा गया था कि सरायमीर के लोग उन्हें औकात बता देंगे। इतना होने के बाद भी पुलिस माहौल खराब करने वालों की रणनीति को भांप नहीं पाई, जबकि सोशल साइटों पर होने वाली इन पोस्टों के बारे में पुलिस पूरी जानकारी थी। यदि धमकी देने वालों पर पहले से ही नकेल कसी गई होती तो सरायमीर में हुए बवाल को रोका जा सकता था। यहीं नहीं ऐसी धमकी को शनिवार को भी हल्के में लिया गया था।