हाथीनाला थाना क्षेत्र में नाबालिग बहनों के साथ दुष्कर्म और जानलेवा हमले के मामले में एडीजे/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ओमकार शुक्ल की अदालत ने दोषी को 15 वर्ष के कठोर कारावास और 47 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने महज 15 माह में सुनवाई पूरी करते हुए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अर्थदंड जमा न करने पर उसे 16 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जुर्माने की राशि जमा होने पर नियमानुसार दोनों पीड़िताओं को आधी-आधी धनराशि दी जाएगी।
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 22 फरवरी 2025 को हाथीनाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना में पुलिस ने पाया कि बेलहत्थी, टोला पिरहवा निवासी रमाशंकर (36) ने पूर्व परिचय का लाभ उठाकर 17 वर्षीय किशोरी को बहाने से जंगल ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर जब उसकी 14 वर्षीय छोटी बहन ने विरोध किया तो आरोपी ने रेलवे लाइन के किनारे बकरी चराने के दौरान उसे मालगाड़ी के सामने धक्का दे दिया। हादसे में किशोरी का दाहिना पैर पंजे के ऊपर से कट गया, जबकि बाएं हाथ की कोहनी में गंभीर चोट आई। पुलिस ने नौ अप्रैल को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। 24 अप्रैल को आरोप तय होने के बाद सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान दोनों बहनों के शैक्षणिक अभिलेखों से उनके नाबालिग होने की पुष्टि हुई। चिकित्सकीय परीक्षण करने वाले डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट समेत कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर न्यायालय ने 23 जुलाई 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया।
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गंभीर अपराधों में कठोर सजा आवश्यक : न्यायालय
दोषसिद्धि के बाद शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने आरोपी का पहला अपराध होने का हवाला देते हुए दंड में नरमी की मांग की, जबकि विशेष लोक अभियोजक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा की पैरवी की। न्यायालय ने कहा कि अपराध की प्रकृति और उसे अंजाम देने के तरीके को देखते हुए कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है। अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड, गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध में 15 वर्ष का कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड, आपराधिक बल प्रयोग के लिए दो वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा जान से मारने की धमकी देने के अपराध में एक वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। विशेष लोक अभियोजक के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।