14 सदन में अपना पक्ष रखते आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव। संवाद
आजमगढ़। सपा के नेता, लोकसभा के मुख्य सचेतक, लोक लेखा समिति के सदस्य एवं आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार को लोकसभा में देशभर के संविदा कर्मियों के हितों से जुड़े मुद्दे को उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश में 18 लाख से अधिक और देशभर में करोड़ों संविदाकर्मी असुरक्षा, कम वेतन और सुविधाओं के अभाव के बीच सेवा दे रहे हैं। उन्हें स्थायी किया जाना चाहिए।
सांसद ने विभिन्न विभागों के संविदा कर्मियों के मानदेय का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि आशा बहुओं को केवल 2000 रुपये, रोजगार सेवकों को 8850 रुपये, शिक्षामित्रों को 10000 रुपये, आंगनबाड़ी कर्मियों को 5000 रुपये, सहायिकाओं को 2700 रुपये, अनुदेशकों को 8700 रुपये और रसोइयों को मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि यह बेहद कम है और इनके भविष्य को सुरक्षित करने वाली कोई व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही इन कर्मियों की नियुक्ति करने वाले ठेकेदार भी शोषण कर रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है। हाल ही में चल रही कई आवश्यक सेवाओं को संविदा कर्मियों ने ही संभाला है, जिनमें अत्यधिक तनाव के कारण कई कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली, जबकि कुछ की हार्ट अटैक से मौत भी हो गई।
धर्मेंद्र यादव ने सरकार से मांग की कि जब देश 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का दावा कर रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कर रहा है, तो ऐसे में संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाए। साथ ही उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं, बीमा, सेवा लाभ, और स्वास्थ्य सुविधाएं उनके परिवार को उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारी देश की सबसे अधिक सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उनके हितों की रक्षा और उनके भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।