उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय महासचिव
देश में मुस्लिम, ईसाई, दलित, पिछड़ों से आरक्षण छीनने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया। ये बातें राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल की ओर से रिक्शा स्टैंड पर बुधवार को आयोजित धरने में राष्ट्रीय महासचिव मौलाना ताहिर मदनी ने कहा।
उन्होंने कहा कि आजादी का पहला उद्देश्य देश के सभी वर्गो की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध कराया जाना था। धर्म, जाति, वर्ग, नस्ल, लिंग, भाषा के भेदभाव के बिना सभी वर्गो के पिछड़ेपन को दूर करने और जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए उन्हें आरक्षण की सुविधा दी गई, जो सदियों से अन्याय के शिकार रहे लेकिन कांग्रेस सरकार ने समाज के विभिन्न दलित, अति पिछड़े वर्गो के साथ भेदभाव करते हुए उन्हें आरक्षण लाभ से वंचित कर दिया।
सरकार के विरुद्ध आंदोलन होने पर 1956 में सिखों को और 1990 में बौद्ध धर्म को मानने वालों को इस आरक्षण सूची में जोड़ दिया गया। कौंसिल के यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष नूरुलहुदा ने कहा कि अन्यायपूर्ण भेदभाव के कारण ही आज कई जातियों के लोग बेदहाल जिंदगी जी रहे हैं। आरक्षण से वंचित होने के कारण आज दलित मुसलमान को नौकरी, राजनीति, शिक्षा और रोजगार में पिछड़े हुए है। धरने में मोहम्मद फैसल, नगर अध्यक्ष बदरे आलम, अलीकदर, साबिर खान बाबू, आरिफ रहमानी, नसीम मंसूरी, अबू हमजा, सद्दाम कुरैशी, संजय यादव मौजूद थे।