आजमगढ़। इसे सिस्टम का दोष कहें या विभागीय उदासीनता। सामान्य हो या तत्काल, रेलवे टिकट पर बाजार के साफ्टवेयर का कब्जा है। करीब 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट तो दलाल अवैध साफ्टवेयर से बुक कर ले रहे हैं। बदले में मनमाना किराया वसूल रहे हैं। रेलवे के आरक्षण काउंटर तो सिर्फ वेटिंग टिकट बुक करने के लिए खुल रहे हैं।
रेलवे सिस्टम के समकक्ष टिकट बुकिंग साफ्टवेयर बनाने का धंधा कोई नया नहीं है। जनपद में तो यह एक कारोबार के रूप में चलता है। कई बार रेलवे की बिजिलेंस टीम व आरपीएफ की टीम ने छापा मारा था। आज भी जांच चल रही है लेकिन धंधा है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा बल्कि और बढ़ता ही जा रहा है। बाजार में खुलेआम ऑफर के साथ अवैध साफ्टवेयर बिक रहे हैं। काउंटरों पर बैठे रेलवे के क्लर्क जब तक सिस्टम में यात्री का नाम और पूरा पता भरते हैं तब तक दलाल इन साफ्टवेयरों के जरिए कंफर्म टिकट बुक कर लेते हैं। पिछले माह ही रेलवे सुरक्षा बल की टीम ने विभिन्न स्थलों पर छापा मार कर ब्लैक टीएस, रेल बुल आदि अवैध साफ्टवेयर पकड़ा था। पकड़े गए कारोबारियों के पास से लाखों रुपये के ई-टिकट बरामद हुए थे। कार्रवाई भी हो रही लेकिन दलालों के हौसले कम नहीं हो रहे। शहर से लेकर गांव तक की दुकानों में बैठे दलाल अवैध साफ्टवेयर से लाखों कमा रहे हैं।