पवई। क्षेत्र के अंडिका गांव में अधूरे सामुदायिक शौचालय को कागजों में पूर्ण दिखाकर सरकारी धन का भुगतान करा लिया गया। तीन साल बाद भी शौचालय आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत ब्लॉक के अधिकारियों से की, लेकिन अभी तक न तो इसकी जांच कराई गई और न ही दोषियों पर कार्रवाई ही की गई।
स्वच्छता को लेकर ब्लाॅक के अधिकारी कितने गंभीर हैं, इसको अंडिका गांव में देखा जा सकता है। शौच के लिए ग्रामीणों को खुले में न जाना पड़े, इसके लिए तीन साल पहले सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू हुआ था। तत्कालीन सचिव व ग्राम प्रधान ने इसको पूरा नहीं कराया। दो कक्ष वाले इस सामुदायिक शौचालय में न तो गड्ढे का निर्माण कराया गया और न ही शौचालय के अंदर सीट लगाई गई। कमरे की फर्श, छत नहीं बन पाया है। आरोप है कि तत्कालीन सचिव व ग्राम प्रधान ने कागजों में पूर्ण दिखाकर 3.75 लाख का भुगतान करा लिया है। ग्राम प्रधान मिथिलेश यादव ने कहा कि यह मेरे कार्यकाल का मामला नहीं है। पूर्व के प्रधान व सचिव द्वारा शौचालय को अधूरा छोड़ दिया गया है। इसकी कई बार शिकायत ब्लाॅक के अधिकारियों से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।