अपने आवास पर कलाकृति तैयार करते भूपेंद्र अस्थाना।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। रचनात्मकता कभी एक आदर्श क्षण के लिए इंतजार नहीं करती है। बल्कि एक आदर्श तभी आता है जब कोई रचनाकार के माध्यम से रचना जन्म लेती है। कोरोना जैसे महामारी के चलते पिछले कई हफ्तों से सभी लोग अपने और अपने परिवार के सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घरों में हैं। यह एक एकांतवास की स्थिति है। ऐसे में लोग समय का सदुपयोग भी कर रहे हैं, नए रचनात्मक कार्य कर रहे हैं।
इसी कड़ी में युवा चित्रकार भूपेंद्र कुमार अस्थाना भी मूर्तिकला में नए प्रयोग कर रहे हैं। दरअसल यह प्रयोग पल्प विधि है। इसे पेपर मैसी या कागज की लुगदी भी कहते हैं। लॉक डाउन के चलते कला सामग्री की उपलब्धता न हो पाने के कारण भूपेंद्र ने घर मे रखे रद्दी अखबारों, पुराने कागजों को ही अपने कला का माध्यम बना लिया। वैसे तो पेपर मैसी बहुत ही पुरानी पद्धति है। इसका प्रयोग बड़ी संख्या में बहुत से कलाकारों ने किया है। इसके माध्यम से मास्क (मुखौटा), खिलौने, पपेट के अलावा भी बहुत सी चीजें बनाई जा सकती हैं। यह बहुत ही आसान होता है। हम अपने घरों में रहकर इसके माध्यम से अपने कल्पनाओं को सुंदर आकर दे सकते हैं। भूपेंद्र अस्थाना ने इस दो महीने के लॉक डाउन के दौरान कई पोर्ट्रेट, खिलौने बनाए। उनका मानना है कि रचनात्मक कार्यों के लिए किसी विशेष समय का इंतजार नहीं किया जाता बल्कि हर पल कलाकार अपनी रचनाओं में ही रहता है। हर पल प्रयोग करता रहता है।
अपने आवास पर कलाकृति तैयार करते भूपेंद्र अस्थाना।- फोटो : AZAMGARH