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बच्चे पास, परीक्षा व्यवस्था में बेसिक शिक्षा विभाग फेल

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जहानागंज। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा एक से आठ तक के बच्चे भले ही फेल न हों, लेकिन वार्षिक परीक्षा की व्यवस्था में बेसिक शिक्षा विभाग फेल हो गया है। शनिवार को परिषदीय स्कूलों में आयोजित परीक्षा को लेकर हुई लापरवाही से कई स्कूलों में निर्धारित विषय का प्रश्न पत्र बच्चों की संख्या के सापेक्ष ही नहीं पहुंच सका। इससे शिक्षकों को आनन-फानन में सादे कागज पर प्रश्न तैयार कर परीक्षा संपन्न करानी पड़ी। हालांकि बच्चों ने पूरा उत्साह दिखाया और उत्तर पुस्तिका में अपनी योग्यता दर्ज की।
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कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष से वार्षिक परीक्षा नहीं हो सकी थी। बच्चों को बगैर परीक्षा के ही अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया था। इस बार कोरोना का प्रभाव कम होने से परीक्षा शुरू कराई गई है। जहानागंज ब्लाक के कंपोजिट विद्यालय जिगरसंडी, प्राथमिक विद्यालय शेरपुरकुटी, कंपोजिट विद्यालय दौलताबाद, कंपोजिट विद्यालय काजीपुर, कंपोजिट विद्यालय कारीसाथ व जूनियर हाईस्कूल जहानागंज समेत अन्य विद्यालयों में प्रश्नपत्र की कमी सामने आई। यहां के विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की संख्या के सापेक्ष कम पश्नपत्र विद्यालयों पर पहुंचे। शिक्षकों ने प्रश्नपत्रों की कॉपी कराकर किसी तरह से परीक्षा कराई। इतना ही नहीं प्रश्न पत्र में पूछे गए प्रश्न भी निर्धारित पाठ्यक्रम से नहीं थे। इसके कारण प्रश्न बच्चों के पल्ले ही नहीं पड़ा। जिससे वह प्रश्नों को हल ही नहीं कर सकें। परीक्षा की शुचिता कायम रहे, इसे लेकर खंड शिक्षाधिकारियों सहित स्टेट रिसोर्स पर्सन आदि ने भ्रमण कर परीक्षा की निगरानी की।
जहानागंज की एसडीआई नीलम ने बताया कि जिस स्कूलों पर प्रश्नपत्र कम हुए थे वहां हमने पहुंचा दिया था। जहां तक रही बात निर्धारित पाठ्यक्रम से सवाल पूछे जाने की तो वह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ही बता सकते हैं।
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इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिंदी मीडियम का पहुंचा प्रश्नपत्र
आजमगढ़। विद्यालय पर छात्र संख्या के अनुसार प्रश्न पत्र नहीं उपलब्ध कराए गए और तो और इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हिंदी मीडियम के प्रश्न पत्र बांट दिए गए। उक्त जानकारी शिक्षा क्षेत्र ठेकमा के इंग्लिश मीडियम प्राइमरी विद्यालय बरदह के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार राय ने दी। उन्होंने बताया कि उनके सामने कोई विकल्प नहीं था। 9.30 बजे पेपर पर्यवेक्षक के सामने खोलना था। पर्यवेक्षक खुद लेट आए करीब 10 बजे पेपर खुला तो पता चला कि पेपर हिंदी मीडियम का है। इतना ही नहीं हिंदी विषय के कक्षा चार का जो प्रश्न पत्र है, कक्षा-पांच को दिया गया। अब बच्चे उसको नहीं समझ पा रहे हैं।
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