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मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चयनित गांव में भी अव्यवस्था

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आजमगढ़। बेहतर कार्य करने वाली जिले की पांच ग्राम पंचायतों के प्रधान को मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार से नवाजा जा रहा। इसके लिए गांवों को शासन से निर्धारित मानकों को पूरा करना होता है। जिसका विभागों की कई टीम गांव में जांच करने पहुंचती और अपनी रिपोर्ट लगाकर शासन को भेजती है। पर यहां क्या सत्यापन कर रिपोर्ट भेजी गई यह सझ से परे है। मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चयनित राजापुर सिकरौर गांव जाने वाले देखकर आसानी से बता सकते हैं कि यहां कूड़ा निस्तारण व नाली की बेहतर व्यवस्था नहीं है। नालियां बन गई है कुछ स्थानों पर निर्माण भी अधूरा है। पूरे गांव का पानी बगल के पोखरी में बहाया जाता है। यहां कूडा भी फेंका जा रहा है। जिससे उठती दुर्गंध से लोग परेशान होते हैं। मिर्जापुर ब्लाक के राजापुर सिकरौर की आबादी करीब 7298 है। इस गांव का चयन मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत किया गया है।
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इस योजना के तहत चयनित गांव पंचायत खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होनी चाहिए। ग्राम पंचायत के प्रत्येक बच्चे-गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण होना चाहिए। विद्यालय में नियमित एमडीएम बनता हो। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चे नियमित पोषाहार पाते हों। गांव में बिजली, सड़क, पानी की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए। गांव में नालियों- गलियों की नियमित सफाई होनी चाहिए। जबकि उक्त गांव में 80 फीसद ही टीकाकरण हुआ है। गांव की सफाई के लिए मात्र एक सफाईकर्मी तैनात है। जिसके कारण गांव में गंदगी दिखाई पड़ रही है। गांव की दो पोखरी जो रोड से सटी हुई है वह बहुत गंदी है। प्रधान का दावा है कि जेसीबी से सफाई कराकर उस जगह पर मिट्टी डाल दी गई है जो बचा है वह भी कार्स जल्दी पूरा होगा। वहीं अभी तक 50 घर ऐसे हैं जिन्हें शौचालय की सुविधाएं नहीं मिली है। जिसेस समस्या आ रही है।
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