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अवैध निर्माण मामले में चेयरमैन, ईओ और जेई प्रथम दृष्टया दोषी, जांच करेगी कमेटी

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आजमगढ़। रोडवेज और ब्रह्मस्थान स्थित स्टेडियम के सामने अवैध रूप से 28 दुकानों के निर्माण के मामले में हुई प्रारंभिक जांच में नगर पालिका आजमगढ़ की चेयरमैन, ईओ और जेई निर्माण को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया गया है। जिलाधिकारी ने प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। इसमें एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और सीआरओ हरिशंकर को रखा गया है। कमेटी को दोषियों का दायित्व निर्धारण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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नगर पालिका की ओर से रोडवेज तिराहा स्थित मंदिर की आड़ में अवैध रूप से आठ दुकानों का निर्माण शुरू कर दिया गया था। इसी के साथ ही ब्रह्मस्थान स्थित स्टेडिम के पास 20 दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित था। इस जमीन पर दुकान का निर्माण करा कर 25 से 30 लाख में आवंटन तक की चर्चाएं थी। निर्माण के लिए न तो प्राधिकरण से नक्शा पास कराया गया था और न ही बोर्ड आदि का कोई प्रस्ताव था। यहां तक कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा था उसके मालिकाना हक को लेकर भी पेंच फंसा था। अमर उजाला के प्रकरण को मुद्दा बनाने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पालिका ने स्वयं सोमवार को रोडवेज के पास का अवैध निर्माण गिरा दिया। इसके साथ ही पालिका के अधिशाषी अधिकारी डॉ. शुभनाथ प्रसाद से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण तलब किया था। मंगलवार शाम को ईओ ने अपनी स्पष्टीकरण एडीएम प्रशासन को सौंप दिया। इसके बाद एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने अपनी प्रारंभिक रिपोट जिलाधिकारी एनपी को सौंपी। डीएम ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में अवैध निर्माण के लिए चेयरमैन, अधिशासी अधिकारी और जेई निर्माण दोषी पाए गए हैं, लेकिन ये स्पष्ट नहीं था कि किसका कितना दोष है। इसलिए प्रकरण की विस्तृत जांच और दायित्व निर्धारण के लिए एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और मुख्य राजस्व अधिकारी हरिशंकर की कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
अधिशासी अधिकारी ने आरोप कबूले, कहा पालिकाध्यक्ष और जेई कसूरवार
आजमगढ़। रोडवेज और ब्रह्मस्थान पर दुकानों के अवैध रूप से निर्माण के मामले में पालिका आजमगढ़ के अधिशासी अधिकारी शुभनाथ प्रसाद ने अपना स्पष्टीकरण जिलाधिकारी सौंप दिया है। इसमें उन्होंने प्रकरण में लगे लगभग सभी आरोप कबूल लिए हैं। साफ लिखा है कि पालिकाध्यक्ष के निर्देश पर अवैध निर्माण कराया जा रहा था। हालांकि अपना बचाव करते हुए कुछ आरोप वो जेई निर्माण पर थोपते नजर आए हैं।
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अपने स्पष्टीकरण में अधिशासी अधिकारी शुभनाथ प्रसाद ने कबूल किया है कि बिना नक्शा पास कराए ही दोनों स्थानों पर निर्माण कराया जा रहा था। दुकानों के निर्माण के लिए कोई कार्ययोजना भी स्वीकृत नहीं हुई थी। बोर्ड की किसी बैठक में इसका प्रस्ताव भी पास नहीं हुआ था। निविदा प्रक्रिया भी अपूर्ण है। वहीं, निविदा खोलने में मेरी संस्तुति नहीं ली गई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा अपना बचाव करते हुए कहा है कि निर्माण मुझसे बिना पूछे जेई निर्माण ओंकार पटेल की ओर से किया जा रहा था। हालांकि ईओ की स्वीकारोक्ति के बाद अब मामले में किसी भी आरोपियों के बचने की संभावना क्षीण नजर आ रही है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में चेयरमैन, ईओ और जेई निर्माण को दोषी पाया गया है। विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। रिपोर्ट मिलते ही मामले में कार्रवाई की जाएगी। एनपी सिंह, जिलधिकारी
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